{"_id":"5c2b657bbdec2257245fffe8","slug":"kamalnath-government-decides-to-give-weekly-leave-to-police-employees","type":"story","status":"publish","title_hn":"कमलनाथ का मध्यप्रदेश पुलिस कर्मचारियों को नए साल का तोहफा, मिलेगा साप्ताहिक अवकाश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कमलनाथ का मध्यप्रदेश पुलिस कर्मचारियों को नए साल का तोहफा, मिलेगा साप्ताहिक अवकाश
Tue, 01 Jan 2019 06:34 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 01 Jan 2019 06:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के मंशानुसार मैदानी पदस्थापना पर कार्यरत समस्त पुलिस कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश देने के लिए आज पुलिस मुख्यालय में बैठक संपन्न हुई। पुलिस महानिदेशक ऋषि शुक्ला ने निर्देश दिए कि मैदानी अमले के कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश प्रदान किया जाएं। शुक्ला ने इस प्रस्ताव के लिए रूप रेखा तैयार करने हेतु निर्देश दिए।
विज्ञापन
शुक्ला ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करते हुए निर्देश दिए कि मैदानी अमले के कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश प्रदान किया जाएं। यदि अपरिहार्य परिस्थिति में कोई कर्मचारी इस अवकाश का उपभोग नहीं कर पाता है तो वह उसी माह में अन्य किसी दिन इस अवकाश का लाभ ले सकेगा। यदि उस माह में वह इस अवकाश का उपभोग नहीं करता है तो यह अवकाश स्वत: समाप्त हो जाएगा।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि शासन का सबसे प्रत्यक्ष विभाग पुलिस है। जनसेवक सरकार का यह अंग ना केवल नागरिक सुरक्षा सुनिश्ति करता है बल्कि जन-धन की रक्षा के साथ शासन के हर विभाग के दायित्व की सुचारूता के लिए उत्तरदायी है। पुलिस विभाग का समस्त विधायी कार्य थाना स्तर पर संपादित होता है, जिनको व्यवस्था में अन्य शाखाओं विशेषकर सशस्त्र बल से सहयोग प्राप्त होता है।
विज्ञापन
समाज की बढ़ती अपेक्षाओं के दबाव समाज की बढ़ती अपेक्षाओं के दबाव ने जमीनी स्तर पर पुलिस कर्मचारियों के लिए दुष्कर स्थितियों निर्मित कर दी है। लगभग चौबीस घंटे की सेवा , रातों दिन, अनिश्चित समय पर भोजन, आराम की कोई मोहलत नहीं होना और लगातार परिणाम देने की अपेक्षा ने कार्यपालिक बल को निरंतर तनाव में रखा है। फलस्वरूप मानसिक अवसाद से लेकर आत्महत्या तक कई पुलिस कर्मी अपना भाग्य मान बैठे हैं।
