सिंधिया के 'सड़क पर उतरेंगे' बयान के पीछे प्रियंका की राज्यसभा सीट! पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच जारी शीतयुद्ध में अब 10 जनपथ का भी प्रवेश हो चुका है। इस साल मध्यप्रदेश के कोटे से खाली हो रही राज्यसभा की दो सीटों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अलावा प्रियंका गांधी के नाम की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि सिंधिया की जगह पर पार्टी प्रियंका गांधी को राज्यसभा भेज सकती है।
अपने इस दांव से सीएम कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को न केवल मात दी है बल्कि उनके राज्यसभा जाने के अरमानों पर भी पानी फेर दिया है। कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी अपने खास की नियुक्ति के लिए लगातार दिल्ली का दौरा कर रहे हैं।
सरकार के खिलाफ पीछे हटने को राजी नहीं सिंधिया
वहीं, सिंधिया घोषणापत्र के बहाने कमलनाथ सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। उन्होंने सोमवार को ग्वालियर में कहा कि मैं जनता का सेवक हूं, जनता के मुद्दों के लिए लड़ना मेरा धर्म है। हमें सब्र रखना है और अगर जिन मुद्दों को हमने अपने वचनपत्र में रखा है उनको हमें पूरा करना ही होगा। अगर नहीं होगा तो हमें सड़क पर उतरना होगा।
मंत्री इमरती बोलीं- सिंधिया सड़कों पर उतरे तो उनके साथ पूरे हिंदुस्तान की कांग्रेस उतरेगी
सिंधिया खेमे की मंत्री इमरती देवी ने समर्थन करते हुए कहा कि वचन-पत्र में वादे अकेले सिंधिया ने नहीं, राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और हम सबने किए हैं। सिंधिया सड़कों पर उतरे तो उनके साथ पूरे हिंदुस्तान की कांग्रेस उतरेगी। हालांकि बाद में उन्होंने खुद को संभालते हुए कहा कि हम वचनपत्र के काम पूरे कर रहे हैं और सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं है।
कमलनाथ बोले- सिंधिया को सड़कों पर उतरना है तो उतरें
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सिंधिया के बयान पर कहा कि ‘उतरना है तो वो उतरें।’ कमलनाथ ने एक दिन पहले भी सिंधिया के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वचन-पत्र में जो वादे किए गए हैं वे पांच साल के लिए है, न कि पांच महीने के लिए।
मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी हावी
मध्यप्रदेश कांग्रेस में मुख्यत तीन गुट सक्रिय हैं जिसमें एक गुट का नेतृत्व मुख्यमंत्री कमलनाथ करते हैं, जबकि दूसरे का ज्योतिरादित्य सिंधिया। तीसरे गुट का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह करते हैं। राज्य में अंदरुनी खींचतान इस कदर हावी है कि तीनों गुट एक दूसरे के खुले तौर पर भी विरोध करते दिख जाते हैं।
प्रियंका के बहाने कमलनाथ ने सिंधिया को दी मात!
मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए खाली हो रही दो सीटों को लेकर जारी खींचतान के बीच एक सीट पर दिग्विजय सिंह की ताजपोशी तय मानी जा रही है। लोकसभा चुनाव हार चुके ज्योतिरादित्य भी मुख्यमंत्री पद न मिलने के बाद राज्यसभा के जरिए अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे थे। लेकिन, कमलनाथ ने प्रियंका गांधी की राज्यसभा के लिए दावेदारी जताकर सिंधिया को घेरने का फुलप्रूफ प्लान तैयार कर रखा है।
दिग्विजय का जलवा बरकरार
कमलनाथ और सिंधिया गुट में आपसी खींचतान का सीधा फायदा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को मिल रहा है। भोपाल से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी उनका राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है। दिग्विजय खुलकर मुख्यमंत्री कमलनाथ के समर्थन में हैं जिसका फायदा उन्हें भोपाल से लेकर दिल्ली तक मिल रहा है।
कांग्रेसप्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी विवाद
कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ देंगे और सीएम के पद पर नंबर दो के दावेदार सिंधिया की ताजपोशी हो जाएगी। इसके अलावा सिंधिया गुट के विधायकों और नेताओं को सरकार-संगठन में बड़ा पद मिलने के आसार जताए जा रहे थे। लेकिन, कमलनाथ ने ऐसा होने नहीं दिया।
10 जनपथ नहीं दे पा रहा कोई समाधान
केंद्रीय नेतृत्व भी कमलनाथ और सिंधिया के बीच जारी खींचतान को खत्म नहीं कर सका है। जब भी राज्य में गुटबाजी तेज होती है तब सीएम कमलनाथ और सिंधिया को दिल्ली बुलाकर समझाया जाता है। हालांकि कुछ दिन बाद पार्टी में फिर कलह शुरू हो जाती है।
मध्यप्रदेश के चार कांग्रेस नेताओं ने पार्टी आलाकमान से मांग की है कि प्रियंका गांधी को मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट से मैदान में उतारा जाए। इस साल अप्रैल में मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीट खाली होने वाली है। इनमें से एक सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह सांसद हैं जबकि अन्य दो सीटों से भाजपा के प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया उच्च सदस्य के सदस्य हैं। तीनों का कार्यकाल पूरा होने वाला है।
साल 2018 में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के बाद संख्या बल को देखते हुए दो सीटों के कांग्रेस जबकि एक के भाजपा के खाते में जाने की उम्मीद है।
आगामी राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव और मध्यप्रदेश के तीन वर्तमान मंत्रियों सज्जन सिंह वर्मा, पी सी शर्मा और जयवर्द्धन सिंह सहित प्रदेश के चार नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से मांग की है कि प्रियंका गांधी को प्रदेश की राज्यसभा सीट से मैदान में उतारा जाए।
मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने ट्वीट किया, इंदिरा गांधी अनुसूचित जाति एवं जनजाति और महिलाओं के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध थीं। प्रियंका उन्हीं के पदचिन्हों पर चल रही हैं। जिस तरह इंदिरा गांधी कमलनाथ को मध्यप्रदेश लाईं थी, उसी तरह अब प्रियंका गांधी को प्रदेश से राज्यसभा भेजने का वक्त आ गया है।
वहीं, अरुण यादव ने ट्वीट किया, समय आ गया है कि राहुल गांधी को एक बार फिर पार्टी की कमान सौंपी जाए। यह भी सामयिक होगा कि प्रियंका गांधी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया जाए, ताकि फासीवादी विचारधारा के ख़िलाफ़ जमीनी संघर्ष की धार को और अधिक तेज किया जा सके।
इसी बीच, मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि लोग कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा में उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी को मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट से संसद भेजा जाना चाहिए। यदि मध्यप्रदेश से नहीं भेजा जाता है तो उन्हें किसी अन्य राज्य से राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए। इससे पार्टी मजबूत होगी।
प्रियंका को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने की मांग को लेकर किए गए सवाल पर प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने कहा कि यदि ऐसा होता है, तो हम सभी को बड़ी प्रसन्नता होगी।
