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सिंधिया के बेटे महाआर्यमन ने ट्वीट कर कहा, पिता पर गर्व है, परिवार कभी सत्ता का भूखा नहीं रहा
Wed, 11 Mar 2020 04:35 AM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, भोपाल
पीटीआई, भोपाल
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 11 Mar 2020 04:35 AM IST
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Mahanaryaman Scindia
- फोटो : Twitter
मध्यप्रदेश के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के फैसले के बाद उनके पुत्र महाआर्यमन सिंधिया ने निर्णय का स्वागत करते हुए मंगलवार को कहा कि उनका परिवार कभी भी सत्ता का लालची नहीं रहा है।
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महाआर्यमन ने कांग्रेस से नाता तोड़ने के अपने पिता के फैसले का स्वागत करते हुए ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। एक ट्वीट में उन्होंने अपने पिता के त्यागपत्र पर कहा कि यह दुख की बात है कि उन्हें यह करना पड़ा।
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एक अन्य ट्वीट में महाआर्यमन ने कहा कि अपने लिए यह स्टैंड लेने पर मुझे अपने पिता पर गर्व है। एक विरासत से इस्तीफा देने के लिए साहस चाहिए। मैं यह कह सकता हूं कि मेरा परिवार कभी सत्ता का भूखा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि भविष्य में देश और मध्यप्रदेश के प्रभावी बदलाव के लिए हम वादा करते हैं।
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I am proud of my father for taking a stand for himself. It takes courage to to resign from a legacy. History can speak for itself when I say my family has never been power hungry. As promised we will make an impactful change in India and Madhya Pradesh wherever our future lies.
— M. Scindia (@AScindia) March 10, 2020
महाआर्यमन का ट्विटर हैंडल वेरिफाइड नहीं है, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद उन्हें फॉलो करते हैं। सिंधिया के करीबी पंकज चतुर्वेदी ने ट्विटर हैंडल ग्वालियर के पूर्व शाही परिवार के युवा के होने की पुष्टि की है।
चतुर्वेदी ने कहा कि महाआर्यमन ने अपनी प्रबंधन की डिग्री अमेरिका के विश्वविद्यालय से पिछले साल पूरी की है। परीक्षा के कारण वह लोकसभा चुनावों में अपने पिता के लिए चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हो सके थे। अब, वह अपने पिता के राजनीतिक कार्यों में सहयोग करते हैं।
इससे पहले मंगलवार सुबह को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिल्ली में एक बैठक के बाद कांग्रेस छोड़ दी। इसके बाद सिंधिया खेमे के कांग्रेस विधायकों का इस्तीफा देने का सिलसिला शुरू हो गया और शाम तक कांग्रेस के 22 बागी विधायकों ने इस्तीफे दे दिए। इससे प्रदेश की कांग्रेस सरकार का संकट गहरा गया और कमलनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार गिरने के कगार पर आ गई है।
