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जैन संत की मौत का रहस्य: पथराई आंखें, खामोश जुबां... आत्महत्या मानने के लिए तैयार नहीं लोग़

Sun, 31 Oct 2021 03:39 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 31 Oct 2021 03:39 PM IST
सार

जैन संत आचार्य विमद सागर की खुदकुशी का मामला अब भी रहस्य बना हुआ है। श्रद्धालु और उन्हें जानने वाले लोग इसे आत्महत्या मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि संत इस तरह का कदम नहीं उठा सकते। पुलिस इस मामले में कई बिंदुओं को ध्यान में रख कर जांच कर रही है।

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Jain Saint Acharya Vimad Sagar death suicide or murder investigation is on news in Hindi
आचार्य विमद सागर का पार्थिव शरीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नंदानगर रोड नं. 3 स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर संत सदन की पहली मंजिल पर आचार्य विमद सागर महाराज का शव फंदे से लटका हुआ मिला था। लोगों का कहना है कि नायलॉन की रस्सी वहां तक कैसे पहुंची, इसकी भी जांच होना चाहिए। 

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हालांकि मौके पर मौजूद समाज के लोग कोई भी बात बताने को तैयार नहीं थे और अनभिज्ञता जाहिर करते रहे। जब पुलिस आचार्य का शव पोस्टमार्टम के लिए लेने जाने लगी तो एक जैन साध्वी और संत अड़ गए कि पोस्टमार्टम नहीं करवाएं। पोस्टमार्टम करवाने से उनकी दीक्षा खंडित होगी। 
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इस पर परदेशीपुरा टीआई पंकज द्विवेदी ने कहा कि दीक्षा तो आत्महत्या करने से भी खंडित हो गई है। काफी जद्दोजहद के बाद समाज के लोग पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए। इस बीच इधर-उधर फोन भी घनघनाते रहे। 
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टीआई ने बताया कि रात 10 बजे पोस्टमार्टम करवाया गया और उसके बाद जैन आचार्य का शव सेवादार अनिल जैन के साथ आए समाज के लोगों को सौंप दिया गया। जानकारी के अनुसार जैन संत आचार्य विमद सागर का रविवार को गोम्मटगिरि के पास स्थित भूमि पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

कमरे में कहां से आई  रस्सी
सबसे बड़ा रहस्य नॉयलॉन की रस्सी पर ही है कि रस्सी कहां से आई। पुलिस का मानना है कि मामला आत्महत्या का ही लग रहा है क्योंकि आचार्य के गले में रस्सी के निशान भी मिले हैं। पास में एक मेज भी थी, जिसे देखकर कहा जा रहा है कि इसी पर चढ़कर फांसी लगाई होगी। आशंका यह भी जताई जा रही है कि संत अपने साथ ही रस्सी लेकर कमरे में गए थे।


नम आंखों से दी जाएगी विदाई
घटनास्थल के बाहर समाज के जनों के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थीं, जो आचार्य की आत्महत्या को लेकर काफी स्तब्ध थीं और विलाप करती रहीं। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि आचार्य इस तरह का कदम उठा लेंगे। रविवार को जैन समाज के सैकड़ों लोगों ने आचार्य को नम आंखों से विदाई दी।

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