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MP High Court: उच्चतम बाढ़ स्तर से 300 मी दूरी मापने के आदेश पर पुनर्विचार, सरकार के आदेश पर फैसला सुरक्षित
Thu, 19 Sep 2024 07:44 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2024 07:44 PM IST
सार
याचिका की सुनवाई के दौरान नगर निगम की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया था कि जबलपुर में साल 2008 के बाद नर्मदा नदी के तीस सौ मीटर दायरे में तिलवाराघाट, ग्वारीघाट, जिलहेरीघाट, रमनगरा, गोपालपुर, दलपतपुर, भेड़ाघाट में कुल 75 अतिक्रमण पाए गए हैं।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नर्मदा नदी के तीन सौ मीटर के दायरे में हुए अवैध निर्माणों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए पूर्व में हाईकोर्ट ने नर्मदा नदी के उच्चतम बाढ़ स्तर से 300 मीटर की दूरी मापने के आदेश जारी किए थे। हाईकोर्ट के उक्त आदेश पर पुनर्विचार के लिए सरकार की तरफ से आवेदन दायर किया गया था। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने आवेदन पर सुनवाई की बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए हैं।
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गौरतलब है कि दयोदय सेवा केंद्र द्वारा नर्मदा नदी के तीन सौ मीटर दायरे में अवैध रूप से निर्माण कार्य किए जाने का आरोप लगाते हुए नर्मदा मिशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पूर्व मंत्री व भाजपा नेता ओमप्रकाश धुर्वे द्वारा डिण्डौरी में बिना अनुमति नर्मदा नदी के लगभग पचास मीटर के दायरे में बहुमंजिला मकान बनाए जाने को भी चुनौती दी गई थी। इसके अलावा एक अवमानना याचिका सहित तीन अन्य संबंधित मामले को लेकर याचिकाएं दायर की गई थी।
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याचिका की सुनवाई के दौरान नगर निगम की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया था कि जबलपुर में साल 2008 के बाद नर्मदा नदी के तीस सौ मीटर दायरे में तिलवाराघाट, ग्वारीघाट, जिलहेरीघाट, रमनगरा, गोपालपुर, दलपतपुर, भेड़ाघाट में कुल 75 अतिक्रमण पाए गए हैं, जिसमें से 41 निजी भूमि पर, 31 शासकीय भूमि तथा तीन आबादी भूमि में पाए गए हैं।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तिलवारा घाट में नर्मदा नदी के उच्चतम बाढ़ स्तर से 300 मीटर की दूरी नापने के आदेश जारी किए थे। सरकार की तरफ से आवेदन दायर करते हुए उक्त आदेश पर पुनर्विचार करने के आग्रह किया गया था। सरकार की तरफ से कहा गया था कि उच्चतम बाढ़ क्षेत्र से 300 मीटर की दूरी में बहुत बड़ा क्षेत्र आता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए हैं।
