एमपी: बलात्कार केस में 10 साल की सजा पाए आरोपी को हाईकोर्ट ने किया दोषमुक्त, डीएनए रिपोर्ट बनी अहम आधार
बलात्कार मामले में जिला न्यायालय से 10 साल की सजा पाए तीरथ उर्फ छोटू टेकाम को हाईकोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया। डीएनए रिपोर्ट में आरोपी और नवजात का मिलान नहीं हुआ। अदालत ने तकनीकी साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ दिया।
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बलात्कार के मामले में जिला न्यायालय से 10 साल की सजा पाए आरोपी को हाईकोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। जस्टिस देव नारायण मिश्रा की एकलपीठ ने अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि आरोपी और नवजात बच्चे का डीएनए आपस में मेल नहीं खाता है। अदालत ने तकनीकी साक्ष्य के अभाव में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसकी सजा निरस्त कर दी।
अपीलकर्ता तीरथ उर्फ छोटू टेकाम की ओर से दायर अपील में बताया गया कि अभियोजन के अनुसार, पड़ोस में रहने वाली मानसिक रूप से असक्षम युवती के परिजन काम के सिलसिले में नागपुर गए थे। वापस लौटने पर उन्होंने देखा कि उनकी बेटी गर्भवती है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अपीलकर्ता ने उसका दैहिक शोषण किया था। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।
मामले की सुनवाई के बाद जिला न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया था। अदालत ने 12 दिसंबर 2024 को विभिन्न धाराओं के तहत उसे अधिकतम 10 साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
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हाईकोर्ट में अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पीड़िता से जन्मे बच्चे और आरोपी का डीएनए आपस में मेल नहीं खाता है। इसलिए आरोपी को बच्चे का जैविक पिता नहीं माना जा सकता। सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने डीएनए रिपोर्ट का अवलोकन किया। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता और नवजात बच्चे का डीएनए आपस में मेल खाता है, जबकि अपीलकर्ता और नवजात बच्चे का डीएनए मेल नहीं खाता।
अदालत ने तकनीकी साक्ष्य के अभाव को देखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया। एकलपीठ ने आरोपी को दोषमुक्त करते हुए जिला न्यायालय द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा निरस्त कर दी।
