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MP High Court: नियम ताक पर रखकर दौड़ रही स्कूल बस और ऑटो, HC ने सरकार को दिए स्टेटस रिपोर्ट पेश करने निर्देश
Tue, 24 Sep 2024 10:45 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2024 10:45 PM IST
सार
सतना बिल्डिंग निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच तथा अन्य की तरफ से दायर याचिकाओं में शहर की सड़कों पर बेखौफ होकर चलने वाले ऑटो लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ऑटो रिक्शा चालकों द्वारा सड़कों में धमाचौकड़ी मचाने तथा नियमों को ताक में रखकर दौड़ रही स्कूल बसों के संचालन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि यातायात नियमों का पालन नहीं छात्रों व आम नागरिकों की जान खतरे में है। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार को फ्रेश स्टेटस रिपोर्ट पेश करने आदेशित किया है।
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सतना बिल्डिंग निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच तथा अन्य की तरफ से दायर याचिकाओं में शहर की सड़कों पर बेखौफ होकर चलने वाले ऑटो लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। ऐसे ऑटो न सिर्फ शहर की यातायात व्यवस्था चौपट करते हैं, बल्कि इस हद तक सवारियों को बैठाते हैं कि हमेशा उनकी जान का खतरा बना रहता है। सवारी बैठाने के लिए ऑटो चालक बीच सड़क में कभी भी वाहन रोक देते हैं। शहर की सड़कों पर धमाचौकड़ी मचाने वाले ऑटो के संचालन को लेकर कई बार सवाल उठे, लेकिन जिला प्रशासन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठा पाने में नाकाम रहा है।
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इसके अलावा स्कूल बस व ऑटो भी नियमों का पालन नहीं करते है। अनाधिकृत कंपनी के गैस किट लगाते है,फस्टेड बॉक्स नहीं होता है। निर्धारित क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाया जाता है। बच्चों को भूरे की तरफ भरकर ले जाया जाता है।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था। इंदौर में 10 हजार तथा भोपाल में 15 हजार ऑटो बिना परमिट संचालित हो रहे हैं। ऑटो संचालन के विनिथामक प्रावधान के तहत अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गयी है। ऑटो में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम अनिर्वाय होगा। इसके अलावा परमीट, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारियों तथा चालकों के कर्तव्य व आचरण भी निर्धारित किये गये है।
प्रदेश भर में दस साल पुराने ऑटो-डीजल रिक्शा को परमिट जारी नहीं किया जायेगा। ऐसे ऑटो रिक्शा को सीएनजी में प्रतिस्थापित किया जायेगा। जबलपुर में अवैध रूप से संचालित डेढ़ सौ ऑटो रिक्षा के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। इसके अलावा अगली सुनवाई के दौरान शपथ-पत्र के साथ प्लान ऑफ एक्शन प्रस्तुत किया जायेगा। युगलपीठ ने मंगलवार को आधा दर्जन से याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए उक्त आदेश जारी किये। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा।
मेडिकल सांइस यूनिवर्सिटी से नर्सिंग-पैरा मेडिकल कोर्स हटाये को चुनौती
फर्जी नर्सिंग मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में सरकार के द्वारा संशोधन कर मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी से नर्सिंग व पैरामेडिकल कोर्स हटाये जाने के खिलाफ आवेदन पेश किया गया। सरकार की तरफ से आवेदन पर जवाब पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस एके पालीवाली की युगलपीठ ने चार सप्ताह का समय प्रदान करते हुए इंडियन नर्सिंग काउंसिल की तरफ से पूर्व में पेश किये गये जवाब के संबंध में हलफनामा पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस जस्टिस संजय द्विवेदी एवं जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 21 सितम्बर को निर्धारित की गयी है।
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में प्रदेश में संचालित नर्सिंग कॉलेजों को चुनौती दी गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई जांच में प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश व मान्यता में हुई गंभीर अनियमितता को उजागर किया था। पीपुल्स यूनिवर्सिटी भोपाल और अरविन्दो मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओर से सत्र 2023-24 की मान्यता मान्यता प्रदान करने याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि कोर्ट में लंबित प्रकरण एवं सीबीआई जांच के कारण सरकार द्वारा 2023-24 की मान्यता प्रदान नहीं की गई है। इससे निजी विश्वविद्यालय को नुकसान उठाना पड़ रहा है। याचिका में राहत चाही गयी थी कि उन्हें सत्र 2023-24 की मान्यता दिलाई जाये।
याचिका की सुनवाई के दौरान आईएनसी की तरफ से शपथ-पत्र प्रस्तुत कर युगलपीठ को बताया गया कि सत्र 2023-24 की मान्यता एवं प्रवेश हेतु कट-ऑफ-डेट अब निकल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि सत्र 2024-25 की मान्यता प्रक्रिया शुरू होने के कारण अब पिछले सत्र की मान्यता एवं प्रवेश हेतु घोषित की गई कट-ऑफ -डेट नहीं बढ़ाई जा सकती। नर्सिंग कॉलेज द्वारा नामांकन के लिए पोर्टल खोले जाने की मांग को युगलपीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बुधवार से परीक्षा प्रारंभ होने वाली है। परीक्षा में किसी प्रकार का व्यावधान उत्पन्न नहीें कर सकते है।
