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MP News: एमडी-एमएस की परीक्षा पर हाईकोर्ट का रोक से इंकार, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन को झटका

Mon, 05 Jun 2023 09:57 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 05 Jun 2023 09:57 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा 6 जून से आयोजित एमडी-एमएस की परीक्षा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में परीक्षा का आयोजन निर्धारित समय अवधि से पूर्व करवाए जाने को चुनौती दी गई थी।

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MP News: High Court refuses to ban MD-MS examination, shock to Junior Doctors Association
Court Room - फोटो : Social Media

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा 6 जून से आयोजित एमडी-एमएस की परीक्षा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में परीक्षा का आयोजन निर्धारित समय अवधि से पूर्व करवाए जाने को चुनौती दी गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सोमवार को हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ के समक्ष यूनिवर्सिटी के एग्जाम कंट्रोलर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 14 जून को निर्धारित की गई है।
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जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा एमडी-एमएस की मुख्य परीक्षा का आयोजन 6 जून से किया जा रहा है। नियम अनुसार एमडी-एमएस की परीक्षा 36 माह में होनी चाहिए। मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा 34 माह में परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना के कारण जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी। कोरोना के 6 माह तक क्लासेस बाधित रहीं। याचिका में कहा गया है कि थीसिस जमा करने के 6 माह बाद परीक्षा का आयोजन किया जाना चाहिए। उनके द्वारा जनवरी में थीसिस जमा की गई थी। मुख्य परीक्षा का आयोजन निर्धारित 6 माह से पहले किया जा रहा है। नियम के अनुसार थीसिस अप्रूवल होने के तीन माह बाद परीक्षा आयोजित होनी चाहिए। अभी तक जमा की गई थीसिस को अप्रूवल नहीं दिया गया है। थीसिस अप्रूवल के बाद ही परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलती है। 
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याचिका में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी नियमों को ताक में रखकर मनमाने तरीके से मुख्य परीक्षा का आयोजन कर रही है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी के एग्जाम कंट्रोलर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि एसोसिएशन ने सभी मेम्बर की अनुमति के बिना उक्त याचिका दायर की है। मेंबरों ने कोई प्रस्ताव पारित कर एसोसिएशन को याचिका लगाने के लिए अधिकृत नहीं किया है। तथ्यों को छिपाकर उक्त याचिका दायर की गई है और अधिकांष स्टूडेंट्स परीक्षा करवाए जाने के पक्ष में हैं। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने मंगलवार से प्रारंभ होने पर परीक्षाओं पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।
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