{"_id":"62c989154ab1a40bfc5462e3","slug":"mp-high-court-why-the-encroachment-was-not-removed-from-the-government-land-the-high-court-sought-answer","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP High Court: शासकीय जमीन से क्यों नहीं हटे अतिक्रमण, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP High Court: शासकीय जमीन से क्यों नहीं हटे अतिक्रमण, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Sat, 09 Jul 2022 07:26 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 09 Jul 2022 07:26 PM IST
सार
सतना जिले के जरियारी के रहने वाले टरकेश्वर तिवारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि गांव की शासकीय जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। कई शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और अतिक्रमणकारी आज भी काबिज हैं।
विज्ञापन
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सतना जिले की मैहर तहसील अंतर्गत ग्राम जरियारी स्थित शासकीय भूमि पर काबिज अतिक्रमण को नहीं हटाए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ व जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जरियारी निवासी टरकेश्वर तिवारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि गांव की शासकीय जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। जबकि 2012 में तहसीलदार ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अप्रैल 2013 में दायर अपील भी खारिज हो गई। इतना ही नहीं वर्ष 2019 में सरकार ने पत्राचार कर उक्त जमीन खाली करने के लिए कहा गया। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और अतिक्रमणकारी आज भी काबिज है।
मामले में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, कमिश्नर रीवा, सतना कलेक्टर, तहसीलदार मैहर, एसएचओं व रामबाई तिवारी को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष रावत ने पक्ष रखा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जरियारी निवासी टरकेश्वर तिवारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि गांव की शासकीय जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। जबकि 2012 में तहसीलदार ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अप्रैल 2013 में दायर अपील भी खारिज हो गई। इतना ही नहीं वर्ष 2019 में सरकार ने पत्राचार कर उक्त जमीन खाली करने के लिए कहा गया। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और अतिक्रमणकारी आज भी काबिज है।
विज्ञापन
मामले में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, कमिश्नर रीवा, सतना कलेक्टर, तहसीलदार मैहर, एसएचओं व रामबाई तिवारी को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष रावत ने पक्ष रखा।
विज्ञापन
