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MP High Court: 13 फीसदी ओबीसी आरक्षण होल्ड करने को चुनौती, हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब

Thu, 21 Jul 2022 09:02 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 21 Jul 2022 09:02 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण को 13 फीसदी होल्ड किए जाने को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की गई हैं। आज हुई सुनवाई में कोर्ट ने मामले में शासन को छह सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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MP High Court: Challenge to hold 13% OBC reservation, High Court seeks response from government
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मप्र हाईकोर्ट में शासन द्धारा ओबीसी आरक्षण को 13 फीसदी होल्ड किए जाने को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की गई हैं। चीफ जस्टिस रविविजय मलिमथ व जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने उक्त मामले में शासन को छह सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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एडवोकेटस वेलफेयर एसोसिएशन के अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि आरक्षण अधिनियम 1994 में किए गए संशोधन 14 अगस्त 2019, जिसमें ओबीसी को 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई है। उक्त संशोधन के प्रवर्तन पर हाईकोर्ट द्वारा किसी भी प्रकार की रोक या स्टे आदेश जारी नहीं किया गया है। 
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ठाकुर ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन की ओर से प्रकरणों में नियुक्त ओआईसी द्वारा 11 जून 2021 को एक आवेदन हाईकोर्ट में दाखिल करके ओबीसी के 13 फीसदी आरक्षण को होल्ड करने का निवेदन किया गया, जिस पर हाईकोर्ट ने 13 जुलाई 2021 को शासन की सहमति से आदेश पारित करके शिक्षक भर्ती में ओबीसी का 13 फीसदी होल्ड किया था। जिसके बाद अक्टूबर 2021 में की गई शिक्षकों की नियुक्तियों में ओबीसी के 16 विषयों में 13 फीसदी पदों को होल्ड कर दिया गया है, जिसके विरुद्ध सैकड़ों ओबीसी के चयनित शिक्षकों ने ओबीसी एडवोकेड्स वेलफेयर एसोसिएशन के अधिवक्ताओं के माध्यम हाईकोर्ट में अनेक याचिका याचिकाएं दायर की हैं। 
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ठाकुर ने बताया कि उक्त याचिकाओं में से दो याचिकाओं पर हुई सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से तर्क दिए गए कि ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण के प्रवर्तन पर हाईकोर्ट की कोई रोक नहीं है तथा उक्त आरक्षण की वैधानिकता को डिसाइड करने में न्यायालय को समय लग रहा है। शासन पक्ष भी उक्त प्रकरणों पर हर मर्तबा समय ले रहा है। जिस पर न्यायालय द्वारा उक्त तर्कों से सहमत होते हुए याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए 6 सप्ताह के अंदर शासन से जवाब तलब किया गया है।
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