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Jabalpur: न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड मामले में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश, अगली सुनवाई 9 सितंबर को
Thu, 01 Sep 2022 08:12 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 01 Sep 2022 08:12 PM IST
सार
जबलपुर के न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड मामले में हाईकोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश की गई है। प्रदेश सरकार द्वारा गठित जांच कमेटी तथा पुलिस जांच की रिपोर्ट सील कवर लिफाफे में सौंपी गई है। बता दें कि हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई थी।
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जबलपुर में चंडाल भाटा क्षेत्र में न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में आग लगने से आठ की मौत हो गई थी।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जबलपुर के न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड में हुई आठ व्यक्तियों की मौत के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा गठित जांच कमेटी तथा पुलिस जांच की रिपोर्ट सील कवर लिफाफे में हाईकोर्ट में पेश की गई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने दोनों रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 9 सितंबर को निर्धारित की है।
बता दें कि लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर में नियम विरुद्ध तरीके से प्राइवेट अस्पताल को संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। कोरोना काल में गत तीन साल में 65 निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति दी गई है। जिन अस्पतालों को अनुमति दी गई है, उनमें नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी के नियमों का पालन नहीं किया गया है। जमीन के उपयोग का उद्देश्य दूसरा होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति दी गई है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र नहीं होने के बाद भी अनुमित दे दी गई।
याचिका में कहा गया था कि भौतिक सत्यापन किए बिना अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। अस्पतालों के मेडिकल व पैरामेडिकल सहित अन्य स्टाफ की जांच तक नहीं की गई है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के मामले में सरकार की तरफ से रिपोर्ट पेश की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि अस्पताल संचालन के लायसेंस के लिए निरीक्षण करने वाली तीन सदस्यीय डॉक्टरों की कमेटी के सदस्यों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
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याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति व्यक्त करते हुए बताया गया था कि उक्त अस्पताल का निरीक्षण डॉ. एलएन पटेल, डॉ. निषेध पटेल तथा डॉ. कमलेश वर्मा द्वारा किया गया था। उनकी निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल संचालन का लायसेंस जारी किया गया था। शहर के सभी निजी अस्पतालों की जांच के लिए बनी 41 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम में ये तीनों डॉक्टर अब भी शामिल हैं, जिन्हें निलंबित किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। युगलपीठ ने अगली सुनवाई के दौरान निलंबन आदेश पेश करने के निर्देश जारी किए थे।
सरकार की तरफ से पेश किए गए शपथ पत्र में बताया गया था कि न्यू लाइफ मल्टी सिटी हॉस्पिटल को पंजीयन के पूर्व किए गए निरीक्षण में क्लीन चिट देने के मामले में दो चिकित्सक एलएन पटेल, निषेध को निलंबित कर दिया गया है। नर्सिंग होम शाखा की जम्मेदारी संभाल रहे डॉ. कमलेश वर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पूरे घटनाक्रम की सिलेवार जांच करते हुए रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।
हाईकोर्ट के आदेश का परिपालन करते हुए घटना की जांच के लिए राज्य सरकार ने संभागायुक्त जबलपुर के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश की है। इसके अलावा पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट भी सील बंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक वागरेचा ने पैरवी की।
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बता दें कि लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर में नियम विरुद्ध तरीके से प्राइवेट अस्पताल को संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। कोरोना काल में गत तीन साल में 65 निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति दी गई है। जिन अस्पतालों को अनुमति दी गई है, उनमें नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी के नियमों का पालन नहीं किया गया है। जमीन के उपयोग का उद्देश्य दूसरा होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति दी गई है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र नहीं होने के बाद भी अनुमित दे दी गई।
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याचिका में कहा गया था कि भौतिक सत्यापन किए बिना अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। अस्पतालों के मेडिकल व पैरामेडिकल सहित अन्य स्टाफ की जांच तक नहीं की गई है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के मामले में सरकार की तरफ से रिपोर्ट पेश की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि अस्पताल संचालन के लायसेंस के लिए निरीक्षण करने वाली तीन सदस्यीय डॉक्टरों की कमेटी के सदस्यों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
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याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति व्यक्त करते हुए बताया गया था कि उक्त अस्पताल का निरीक्षण डॉ. एलएन पटेल, डॉ. निषेध पटेल तथा डॉ. कमलेश वर्मा द्वारा किया गया था। उनकी निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल संचालन का लायसेंस जारी किया गया था। शहर के सभी निजी अस्पतालों की जांच के लिए बनी 41 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम में ये तीनों डॉक्टर अब भी शामिल हैं, जिन्हें निलंबित किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। युगलपीठ ने अगली सुनवाई के दौरान निलंबन आदेश पेश करने के निर्देश जारी किए थे।
सरकार की तरफ से पेश किए गए शपथ पत्र में बताया गया था कि न्यू लाइफ मल्टी सिटी हॉस्पिटल को पंजीयन के पूर्व किए गए निरीक्षण में क्लीन चिट देने के मामले में दो चिकित्सक एलएन पटेल, निषेध को निलंबित कर दिया गया है। नर्सिंग होम शाखा की जम्मेदारी संभाल रहे डॉ. कमलेश वर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पूरे घटनाक्रम की सिलेवार जांच करते हुए रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।
हाईकोर्ट के आदेश का परिपालन करते हुए घटना की जांच के लिए राज्य सरकार ने संभागायुक्त जबलपुर के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश की है। इसके अलावा पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट भी सील बंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक वागरेचा ने पैरवी की।
