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Jabalpur: बर्खास्त कर्मचारी को चेक से दे सकते हैं वेतन व मुआवजा, हाईकोर्ट ने खारिज किया श्रम न्यायालय का आदेश
Wed, 08 May 2024 09:12 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 08 May 2024 09:12 PM IST
सार
श्रम न्यायालय ने मुआवजा तथा वेतन का भुगतान नगद रूप में नहीं किए के कारण बर्खास्ती के आदेश को निरस्त कर दिया था। जिसे चुनौती देते हुए उक्त याचिका दायर की गई है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चेक के माध्यम से मुआवजा तथा एक माह का भुगतान किए जाने के कारण श्रम न्यायालय द्वारा कर्मचारी के बर्खास्ती का आदेश निरस्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने अपने आदेश में कहा है कि बर्खास्ती आदेश के साथ कर्मचारी को भुगतान किए जाने का प्रावधान है। भुगतान चेक व नगद दोनों रूप में किया जा सकता है। एकलपीठ ने श्रम न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया।
बता दें कि मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि कर्मचारी हरिचरण को बर्खास्त करते हुए उसे एक माह के वेतन तथा मुआवजा के अलग-अलग चेक दिए गए थे। कर्मचारी ने दोनों चेक स्वीकार कर लिए थे। इसके बाद बर्खास्ती के आदेश को चुनौती देते हुए उसने श्रम न्यायालय में आवेदन दायर किया था। श्रम न्यायालय ने मुआवजा तथा वेतन का भुगतान नगद रूप में नहीं किए के कारण बर्खास्ती के आदेश को निरस्त कर दिया था। जिसे चुनौती देते हुए उक्त याचिका दायर की गई है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25 एफ के तहत बर्खास्ती आदेश के साथ कर्मचारी को वेतन व मुआवजा का भुगतान करने के आदेश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह नहीं कहा है कि भुगतान नगद किया जाए। एकलपीठ ने चेक द्वारा किए गए भुगतान को वैधानिक मानते हुए श्रम न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया।
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बता दें कि मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि कर्मचारी हरिचरण को बर्खास्त करते हुए उसे एक माह के वेतन तथा मुआवजा के अलग-अलग चेक दिए गए थे। कर्मचारी ने दोनों चेक स्वीकार कर लिए थे। इसके बाद बर्खास्ती के आदेश को चुनौती देते हुए उसने श्रम न्यायालय में आवेदन दायर किया था। श्रम न्यायालय ने मुआवजा तथा वेतन का भुगतान नगद रूप में नहीं किए के कारण बर्खास्ती के आदेश को निरस्त कर दिया था। जिसे चुनौती देते हुए उक्त याचिका दायर की गई है।
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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25 एफ के तहत बर्खास्ती आदेश के साथ कर्मचारी को वेतन व मुआवजा का भुगतान करने के आदेश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह नहीं कहा है कि भुगतान नगद किया जाए। एकलपीठ ने चेक द्वारा किए गए भुगतान को वैधानिक मानते हुए श्रम न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया।
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