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Jabalpur: CHMO को इंक्रीमेंट रोकने की सजा पर MPHC ने मांगा हलफनामा, अस्पताल अग्निकांड में आठ मौत का मामला
Mon, 04 Mar 2024 09:38 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 04 Mar 2024 09:38 PM IST
सार
जबलपुर के अस्पताल अग्निकांड में सरकार की कार्रवाई से हाईकोर्ट संतुष्ट नजर नहीं आया। एक्शन टेकन रिपोर्ट में सरकार ने बताया था कि तत्कालीन सीएचएमओ के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक इंक्रीमेंट रोका गया है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि वह सजा से संतुष्ट हैं, इस संबंध में हलफनामे के साथ जवाब पेश करें।
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जबलपुर में अस्पताल में लगी आग के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
जबलपुर के न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड में हुई आठ व्यक्तियों की मौत के मामले में सरकार की तरफ से एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की गई। सरकार की तरफ से बताया गया कि तत्कालीन सीएचएमओ के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक इंक्रीमेंट रोका गया है। अस्पताल का निरीक्षण करने वाले डॉक्टरों की टीम के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने आठ व्यक्ति की मौत पर एक इंक्रीमेंट रोकने की सजा को गंभीरता से लिया। युगलपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि वह सजा से संतुष्ट हैं, इस संबंध में हलफनामे के साथ जवाब पेश करें।
लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विशाल बघेल, शैलेन्द्र बारी व अन्य की तरफ से दायर याचिका में जबलपुर में नियम विरुद्ध तरीके से प्राइवेट अस्पताल को संचालन की अनुमति प्रदान किए जाने को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि नियमों को ताक में रखकर संचालित न्यू लाइफ अस्पताल में हुए अग्नि हादसे में हुई आठ व्यक्तियों की मौत हो गई थी। आपालकानील द्वार नहीं होने के कारण लोग बाहर तक नहीं निकल पाए थे। इधर बताया गया था कि कोरोना काल में गत तीन साल में 65 निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति दी गई है। जिन अस्पतालों को अनुमति दी गई है,उनमें नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी के नियमों का पालन नहीं किया गया है। जमीन के उपयोग का उद्देश्य दूसरा होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति दी गई है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र नहीं होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। भौतिक सत्यापन किए बिना अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है।
याचिका पर हुई पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की गई थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से आपत्ति पेश करते हुए युगलपीठ को बताया गया था कि एक्शन टेकन रिपोर्ट में एफआईआर की वर्तमान स्थिति के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके अलावा नियम विरुद्ध तरीके से अस्पताल संचालित करने की अनुमति देने वाले कितने अधिकारियों के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया, इसकी भी जानकारी नहीं है। किन अस्पतालों पर एक्शन लिया गया इस संबंध में भी कोई जानकारी नहीं है।
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याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करते हुए उक्त जानकारी पेश की गई। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए।
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लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विशाल बघेल, शैलेन्द्र बारी व अन्य की तरफ से दायर याचिका में जबलपुर में नियम विरुद्ध तरीके से प्राइवेट अस्पताल को संचालन की अनुमति प्रदान किए जाने को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि नियमों को ताक में रखकर संचालित न्यू लाइफ अस्पताल में हुए अग्नि हादसे में हुई आठ व्यक्तियों की मौत हो गई थी। आपालकानील द्वार नहीं होने के कारण लोग बाहर तक नहीं निकल पाए थे। इधर बताया गया था कि कोरोना काल में गत तीन साल में 65 निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति दी गई है। जिन अस्पतालों को अनुमति दी गई है,उनमें नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी के नियमों का पालन नहीं किया गया है। जमीन के उपयोग का उद्देश्य दूसरा होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति दी गई है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र नहीं होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। भौतिक सत्यापन किए बिना अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है।
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याचिका पर हुई पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की गई थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से आपत्ति पेश करते हुए युगलपीठ को बताया गया था कि एक्शन टेकन रिपोर्ट में एफआईआर की वर्तमान स्थिति के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके अलावा नियम विरुद्ध तरीके से अस्पताल संचालित करने की अनुमति देने वाले कितने अधिकारियों के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया, इसकी भी जानकारी नहीं है। किन अस्पतालों पर एक्शन लिया गया इस संबंध में भी कोई जानकारी नहीं है।
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याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करते हुए उक्त जानकारी पेश की गई। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए।
