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Jabalpur: मासूम बेटी के हत्यारे पिता को उम्रकैद, लाश कुएं में फेंककर रची थी लापता होने की कहानी
Wed, 13 Sep 2023 10:17 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 13 Sep 2023 10:17 PM IST
सार
जबलपुर में 22 माह की बेटी की हत्या करने वाले आरोपी पिता को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। उसे उम्रकैद की सजा दी गई है। वह पत्नी के चरित्र पर शक करता था और उसे लगता था कि यह बेटी उसकी नहीं है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पत्नी के चरित्र पर संदेह करते हुए खुद की 22 माह की बेटी की हत्या करने वाले आरोपी को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। उसे उम्रकैद की सजा दी गई है। आरोपी ने हत्या कर लाश कुएं में फेंक दी थी और झूठी कहानी बना रहा था। सत्र न्यायाधीश आलोक अवस्थी ने हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत आरोपी पिता को अधिकतम आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार आरोपी सुदर्शन उर्फ मोनू वाल्मीकि निवासी भैरव नगर ने 17 जनवरी 2020 को घर से 22 माह की मासूम बच्ची देविका के लापता होने की रिपोर्ट तिलवारा घाट थाने में दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि रात के समय परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे। बच्ची भी अपने माता-पिता के साथ सो रही थी। बच्ची को 16-17 की दरम्यानी रात कोई अज्ञात व्यक्ति उठाकर ले गया। पुलिस ने विवेचना के दौरान लापता बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। बच्ची का शव 22 जनवरी को घर से कुछ दूर पर स्थित कुएं में पत्थर से बंधा हुआ बरामद हुआ।
जांच में पुलिस को मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने परिजनों से पूछताछ की। आरोपी की पत्नी पूजा ने पुलिस को बताया कि पति उस पर चरित्र संदेह करता है। इसी कारण से वह देविका को अपनी बेटी नहीं मानता था। पति ने 16-17 जनवरी की दरम्यानी रात को बेटी की गला दबाकर हत्या की थी। किसी को कुछ बताने पर मुझे तथा पेट में पल रहे गर्भ को मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर प्रकरण को न्यायालय में पेश किया था।
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न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्य तथा गवाहों के आधार पर आरोपी पिता को मासूम बेटी की हत्या करने, साक्ष्य छुपाने तथा जान से मारने की धमकी देने का दोषी पाया। न्यायालय ने धारा 302 के तहत आजीवन कारावास, धारा 201 के साल तथा धारा 506 के तहत सात साल की सजा से दंडित किया है।
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अभियोजन के अनुसार आरोपी सुदर्शन उर्फ मोनू वाल्मीकि निवासी भैरव नगर ने 17 जनवरी 2020 को घर से 22 माह की मासूम बच्ची देविका के लापता होने की रिपोर्ट तिलवारा घाट थाने में दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि रात के समय परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे। बच्ची भी अपने माता-पिता के साथ सो रही थी। बच्ची को 16-17 की दरम्यानी रात कोई अज्ञात व्यक्ति उठाकर ले गया। पुलिस ने विवेचना के दौरान लापता बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। बच्ची का शव 22 जनवरी को घर से कुछ दूर पर स्थित कुएं में पत्थर से बंधा हुआ बरामद हुआ।
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जांच में पुलिस को मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने परिजनों से पूछताछ की। आरोपी की पत्नी पूजा ने पुलिस को बताया कि पति उस पर चरित्र संदेह करता है। इसी कारण से वह देविका को अपनी बेटी नहीं मानता था। पति ने 16-17 जनवरी की दरम्यानी रात को बेटी की गला दबाकर हत्या की थी। किसी को कुछ बताने पर मुझे तथा पेट में पल रहे गर्भ को मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर प्रकरण को न्यायालय में पेश किया था।
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न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्य तथा गवाहों के आधार पर आरोपी पिता को मासूम बेटी की हत्या करने, साक्ष्य छुपाने तथा जान से मारने की धमकी देने का दोषी पाया। न्यायालय ने धारा 302 के तहत आजीवन कारावास, धारा 201 के साल तथा धारा 506 के तहत सात साल की सजा से दंडित किया है।
