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Jabalpur: बगैर अनुमति रादुविवि संचालित कर रहा कृषि कोर्स, हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस
Mon, 12 Sep 2022 07:27 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 12 Sep 2022 07:27 PM IST
सार
याचिका में कहा गया था कि रादुविवि तथा निजी संस्थान में कृषि कोर्स में प्रवेश के लिए आवश्यक प्री-एग्रीकल्चर टेस्ट में उत्तीर्ण हुए बगैर ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है। जबकि राज्य कृषि यूनिवर्सिटीज में प्रवेश के लिए यह परीक्षा पास करना अनिवार्य है।
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- फोटो : istock
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विस्तार
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय व साईखेड़ा जिला छिंदवाड़ा के निजी संस्थान में नेशनल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च की अनुमति के बिना कृषि कोर्स संचालित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए नेशनल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि रादुविवि तथा निजी संस्थान में कृषि कोर्स में प्रवेश के लिए आवश्यक प्री-एग्रीकल्चर टेस्ट में उत्तीर्ण हुए बगैर ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है। राज्य कृषि यूनिवर्सिटीज में प्रवेश के लिए यह परीक्षा पास करना अनिवार्य है। इस कारण छात्रों में भेदभाव निर्माण हो रहा है। आईसीएआर के अनुशंसाओं बगैर संचालित कृषि कोर्स से प्राप्त डिग्रियों की मान्यता पर सवालिया निशान खड़े हुए तो छात्रों का भविष्य अंधकार हो सकता है।
बताया गया कि जबलपुर तथा ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालयों के कोर्स को आईसीएआर के मापदंड परीक्षण बोर्ड द्वारा सर्टिफिकेट दिया गया है। जबलपुर के रादुविवि तथा निजी संस्थान के कृषि शिक्षण को आईसीएआर के मापदंड बोर्ड द्वारा सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को कृषि कोर्स के संचालन के संबंध में मान्यता व संबद्धता संबंधित दस्तावेज पेश करने आदेश जारी किए थे। याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेज की जांच के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुरेन्द्र वर्मा पैरवी कर रहे हैं।
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नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि रादुविवि तथा निजी संस्थान में कृषि कोर्स में प्रवेश के लिए आवश्यक प्री-एग्रीकल्चर टेस्ट में उत्तीर्ण हुए बगैर ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है। राज्य कृषि यूनिवर्सिटीज में प्रवेश के लिए यह परीक्षा पास करना अनिवार्य है। इस कारण छात्रों में भेदभाव निर्माण हो रहा है। आईसीएआर के अनुशंसाओं बगैर संचालित कृषि कोर्स से प्राप्त डिग्रियों की मान्यता पर सवालिया निशान खड़े हुए तो छात्रों का भविष्य अंधकार हो सकता है।
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बताया गया कि जबलपुर तथा ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालयों के कोर्स को आईसीएआर के मापदंड परीक्षण बोर्ड द्वारा सर्टिफिकेट दिया गया है। जबलपुर के रादुविवि तथा निजी संस्थान के कृषि शिक्षण को आईसीएआर के मापदंड बोर्ड द्वारा सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को कृषि कोर्स के संचालन के संबंध में मान्यता व संबद्धता संबंधित दस्तावेज पेश करने आदेश जारी किए थे। याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेज की जांच के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुरेन्द्र वर्मा पैरवी कर रहे हैं।
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