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Jabalpur: जवाब न देने पर नगर निगम पर 25 हजार की कॉस्ट, गलती करने वाले अधिकारी से व्यक्तिगत वसूली जाएगी राशि
Sun, 02 Oct 2022 06:43 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 02 Oct 2022 06:43 PM IST
सार
ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी संघ की ओर से यह मामला वर्ष 2019 में दायर किया गया था, लेकिन ढाई साल की अवधि बीत जाने के बावजूद भी नगर निगम की ओर से जवाब पेश नहीं किया गया।
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- फोटो : istock
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कई अवसरों के बावजूद भी नगर निगम जबलपुर द्वारा जवाब न दिए जाने के मामले को काफी सख्ती से लिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम पर 25 हजार की कॉस्ट लगाई है। एकलपीठ ने आदेश दिए हैं कि उक्त कॉस्ट की राशि गलती करने वाले अधिकारी से व्यक्तिगत वसूली की जाए, ननि के खजाने से नहीं।
एकलपीठ ने उक्त जुर्माने की राशि विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जवाब के लिए15 दिनों का समय देते हुए कहा कि यदि जवाब नहीं आया तो निगमायुक्त को व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होना होगा। अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
यह मामला ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी संघ अध्यक्ष राजेश अग्रवाल बबलू की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि नगर निगम में ट्रांसपोर्ट नगर के 69 व्यापारियों के प्लाटों का आवंटन 1992 में हो गया था। आवंटन के 30 साल बाद आज तक नगर निगम द्वारा ट्रांसपोर्ट व्यापारियों की लीज नहीं बनाई गई। जिस पर ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी संघ की ओर से यह मामला वर्ष 2019 में दायर किया गया था, लेकिन ढाई साल की अवधि बीत जाने के बावजूद भी नगर निगम की ओर से जवाब पेश नहीं किया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने ननि पर 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए अगली सुनवाई पर जवाब न आने पर निगमायुक्त को हाजिर होने के निर्देश दिेए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आरपी खरे ने पक्ष रखा।
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एकलपीठ ने उक्त जुर्माने की राशि विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जवाब के लिए15 दिनों का समय देते हुए कहा कि यदि जवाब नहीं आया तो निगमायुक्त को व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होना होगा। अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
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यह मामला ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी संघ अध्यक्ष राजेश अग्रवाल बबलू की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि नगर निगम में ट्रांसपोर्ट नगर के 69 व्यापारियों के प्लाटों का आवंटन 1992 में हो गया था। आवंटन के 30 साल बाद आज तक नगर निगम द्वारा ट्रांसपोर्ट व्यापारियों की लीज नहीं बनाई गई। जिस पर ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी संघ की ओर से यह मामला वर्ष 2019 में दायर किया गया था, लेकिन ढाई साल की अवधि बीत जाने के बावजूद भी नगर निगम की ओर से जवाब पेश नहीं किया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने ननि पर 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए अगली सुनवाई पर जवाब न आने पर निगमायुक्त को हाजिर होने के निर्देश दिेए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आरपी खरे ने पक्ष रखा।
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