फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   High court took cognizance of increasing crime of sexual offence against minor

Jabalpur: नाबालिग से यौन अपराध के बढ़ते मामलों पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, इस मामले में सरकारों से मांगा जवाब

Fri, 20 Dec 2024 11:27 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 20 Dec 2024 11:27 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने नाबालिगों के साथ यौन अपराधों में वृद्धि पर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को पॉक्सो एक्ट की धारा 43 और 44 के तहत जागरूकता, प्रचार और क्रियान्वयन के उपायों पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। 

विज्ञापन
High court took cognizance of increasing crime of sexual offence against minor
high court

विस्तार

नाबालिग बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न और अपराधों में वृद्धि पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार सहित अन्य संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी कर पॉक्सो एक्ट की धारा 43 और 44 के तहत उठाए गए कदमों पर जवाब मांगा है।

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 को 14 नवंबर 2012 से लागू किया गया, परंतु जागरूकता और सही क्रियान्वयन की कमी के कारण नाबालिगों के साथ अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में फिलहाल कुल 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं, जिनमें पॉक्सो एक्ट के तहत सजा के खिलाफ दायर मामले शामिल हैं।
विज्ञापन


अपराधों के बढ़ने के कारण और सुधार की आवश्यकता
हाईकोर्ट ने माना कि अपराधों में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के बारे में जागरूकता की कमी है। धारा 43 के तहत केंद्र और राज्य सरकारों का दायित्व है कि अधिनियम के व्यापक प्रचार-प्रसार और संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देने के लिए उचित कदम उठाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

साथ ही, धारा 44 के तहत, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है।


युगलपीठ ने महिला एवं बाल विकास विभाग के केंद्रीय सचिव, प्रदेश के मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed