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Jabalpur News: हाईकोर्ट ने भोपाल कलेक्टर को किया तलब, अवमानना याचिका में नहीं दी संबंधित जानकारी
Thu, 03 Apr 2025 10:48 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Apr 2025 10:48 AM IST
सार
पिछली सुनवाई में कलेक्टर की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि बिल्डर की संपत्ति को सीज कर नीलाम किया जा रहा है, इससे मिलने वाली राशि से याचिकाकर्ता को भुगतान किया जाएगा। एकलपीठ ने नीलामी प्रक्रिया के संबंध में न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए थे, जो कलेक्टर की ओर से नहीं किया गया।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आदेश के बावजूद भोपाल कलेक्टर ने जबलपुर हाईकोर्ट में कार्रवाई के संबंध में जानकारी प्रस्तुत नहीं की, जिसे गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस एके सिंह की एकलपीठ ने भोपाल कलेक्टर को तलब किया है। एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की है।
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भोपाल निवासी अधिवक्ता अरविंद वर्मा द्वारा दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण, मध्य प्रदेश ने बिल्डर के खिलाफ कलेक्टर भोपाल के माध्यम से लगभग 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत ब्याज के साथ आरआरसी वर्ष 2020 में जारी की थी। कलेक्टर द्वारा जारी आरआरसी का निष्पादन नहीं किए जाने के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए 60 दिनों में आरआरसी के निष्पादन के आदेश कलेक्टर भोपाल को जारी किए थे।
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हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित समयावधि में आदेश का पालन नहीं किए जाने के कारण अवमानना याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने आरआरसी के निष्पादन के लिए तीस दिनों का समय प्रदान किया था। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि याचिकाकर्ता को दूसरी बार अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी तो प्रथम और द्वितीय अवमानना याचिका की लागत जिला कलेक्टर भोपाल से वसूली जाएगी। निर्धारित समयावधि के बावजूद आदेश का पालन नहीं किए जाने के कारण दूसरी बार अवमानना याचिका दायर की गई है।
कलेक्टर की ओर से जानकारी नहीं दी गई
पिछली सुनवाई के दौरान कलेक्टर की तरफ से यह प्रस्तुत किया गया था कि बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसकी संपत्ति को सीज कर नीलाम किया जा रहा है और नीलामी की राशि से याचिकाकर्ता को भुगतान किया जाएगा। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान नीलामी प्रक्रिया के संबंध में न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, भोपाल कलेक्टर की ओर से इसे लेकर कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई। इसे गंभीरता से लेते हुए एकलपीठ ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ध्रुव वर्मा और कपिल दुग्गल ने पैरवी की।
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भोपाल निवासी अधिवक्ता अरविंद वर्मा द्वारा दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण, मध्य प्रदेश ने बिल्डर के खिलाफ कलेक्टर भोपाल के माध्यम से लगभग 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत ब्याज के साथ आरआरसी वर्ष 2020 में जारी की थी। कलेक्टर द्वारा जारी आरआरसी का निष्पादन नहीं किए जाने के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए 60 दिनों में आरआरसी के निष्पादन के आदेश कलेक्टर भोपाल को जारी किए थे।
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हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित समयावधि में आदेश का पालन नहीं किए जाने के कारण अवमानना याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने आरआरसी के निष्पादन के लिए तीस दिनों का समय प्रदान किया था। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि याचिकाकर्ता को दूसरी बार अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी तो प्रथम और द्वितीय अवमानना याचिका की लागत जिला कलेक्टर भोपाल से वसूली जाएगी। निर्धारित समयावधि के बावजूद आदेश का पालन नहीं किए जाने के कारण दूसरी बार अवमानना याचिका दायर की गई है।
कलेक्टर की ओर से जानकारी नहीं दी गई
पिछली सुनवाई के दौरान कलेक्टर की तरफ से यह प्रस्तुत किया गया था कि बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसकी संपत्ति को सीज कर नीलाम किया जा रहा है और नीलामी की राशि से याचिकाकर्ता को भुगतान किया जाएगा। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान नीलामी प्रक्रिया के संबंध में न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, भोपाल कलेक्टर की ओर से इसे लेकर कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई। इसे गंभीरता से लेते हुए एकलपीठ ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ध्रुव वर्मा और कपिल दुग्गल ने पैरवी की।
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