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Jabalpur News: महाविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया पर लगाई रोक पर हाईकोर्ट का स्थगन, नोटिस जारी कर मांगा जवाब
Mon, 25 May 2026 10:21 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 10:21 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय द्वारा रेवनाथ चौरे शिक्षण महाविद्यालय की ई-प्रवेश प्रक्रिया पर लगाई गई रोक पर अंतरिम स्थगन दे दिया। कॉलेज ने तर्क दिया कि वह 23 वर्षों से संचालित है और नाम-पते में केवल टंकण त्रुटि थी। कोर्ट ने आदेश पर रोक लगाकर विश्वविद्यालय से जवाब मांगा।
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मप्र हाईकोर्ट
विस्तार
राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा द्वारा रेवनाथ चौरे शिक्षण महाविद्यालय रिधौरा सौंसर पर ई-प्रवेश प्रक्रिया पर लगाई गई रोक पर स्टे मिल गया है। विवि के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन एवं जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित में आदेष पर स्थगन जारी किए हैं।
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रेवनाथ चौरे शिक्षण महाविद्यालय की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा द्वारा 25 सितम्बर 2025 को जारी आदेश के तहत महाविद्यालय की ई-प्रवेश प्रक्रिया रोक दी थी, जिसके द्वारा उसके पाठ्यक्रम में प्रवेश होते हैं। विश्वविद्यालय द्वारा यह कारण बताया गया था कि याचिकाकर्ता महाविद्यालय के नाम एवं पते में, जैसा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा अंकित किया गया है तथा स्थल के भौतिक सत्यापन में जो पाया गया, उसमें अंतर है।
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याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उनका महाविद्यालय पिछले 23 वर्षों से पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। उसे प्रारंभ में डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से तथा बाद में राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा से संबद्धता प्रदान की गई थी। महाविद्यालय का अभी तक एक दर्जन से अधिक बार निरीक्षण हो चुके हैं। टंकण त्रुटि को छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय ने गलत रूप से घातक मान लिया। महाविद्यालय के ई-प्रवेश को उच्च शिक्षा विभाग से स्वीकृति प्राप्त थी तथा ऐसी कोई परिस्थिति नहीं थी जिसके आधार पर शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पूर्व इस अवधि में म-प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसा आदेश पारित किया जा सके।
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश के क्रियावन्यन पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नरिन्दर पाल सिंह रूपराह के साथ आदित्य कृष्ण अधिवक्ता उपस्थित हुए।
