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MP High Court: डॉ. हरिसिंह गौर विवि के रजिस्ट्रार की नियुक्ति अवैध, हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद्द की
Wed, 20 Nov 2024 09:48 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2024 09:48 PM IST
सार
मप्र हाईकोर्ट ने सागर के डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पद पर डॉ. रंजन कुमार प्रधान की नियुक्ति को अवैध ठहराया है। जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने कहा है कि विज्ञापन में दी गई अनुभव की शर्तें डॉ. प्रधान पूरी नहीं करते, जिस कारण वह उक्त पद के योग्य नहीं है।
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high court
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सागर स्थित डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. रंजन कुमार प्रधान की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया। जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने निर्णय में कहा कि विज्ञापन में अनुभव से संबंधित जो शर्तें निर्धारित थीं, डॉ. प्रधान उन्हें पूरा नहीं करते, जिससे वह रजिस्ट्रार पद के योग्य नहीं हैं।
हाईकोर्ट का यह आदेश विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दायर अपील पर आया, जिसमें एकलपीठ के 31 मई 2024 को दिए गए निर्णय को चुनौती दी गई थी। उस आदेश में डॉ. प्रधान को रजिस्ट्रार पद पर बहाल करने का निर्देश दिया गया था।
बता दें कि डॉ. प्रधान ने 15 मार्च 2022 को विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर रजिस्ट्रार पद के लिए आवेदन किया था। 29 दिसंबर 2022 को कार्यपरिषद की बैठक में चयन समिति की अनुशंसा पर उन्हें नियुक्त किया गया। हालांकि, नीति आयोग और डीआरटी गुवाहाटी से मिली जानकारी के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पाया कि डॉ. प्रधान अनुभव की पात्रता पूरी नहीं करते। छानबीन समिति ने 8 नवंबर 2023 को अपनी रिपोर्ट में डॉ. प्रधान को अयोग्य करार देते हुए नियुक्ति निरस्त करने की सिफारिश की। इसके बाद विवि की कार्यपरिषद ने 1 दिसंबर 2023 को उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।
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हाईकोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने विवि प्रशासन की कार्रवाई को उचित ठहराया और एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए डॉ. प्रधान की नियुक्ति रद्द कर दी।
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हाईकोर्ट का यह आदेश विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दायर अपील पर आया, जिसमें एकलपीठ के 31 मई 2024 को दिए गए निर्णय को चुनौती दी गई थी। उस आदेश में डॉ. प्रधान को रजिस्ट्रार पद पर बहाल करने का निर्देश दिया गया था।
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बता दें कि डॉ. प्रधान ने 15 मार्च 2022 को विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर रजिस्ट्रार पद के लिए आवेदन किया था। 29 दिसंबर 2022 को कार्यपरिषद की बैठक में चयन समिति की अनुशंसा पर उन्हें नियुक्त किया गया। हालांकि, नीति आयोग और डीआरटी गुवाहाटी से मिली जानकारी के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पाया कि डॉ. प्रधान अनुभव की पात्रता पूरी नहीं करते। छानबीन समिति ने 8 नवंबर 2023 को अपनी रिपोर्ट में डॉ. प्रधान को अयोग्य करार देते हुए नियुक्ति निरस्त करने की सिफारिश की। इसके बाद विवि की कार्यपरिषद ने 1 दिसंबर 2023 को उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।
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हाईकोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने विवि प्रशासन की कार्रवाई को उचित ठहराया और एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए डॉ. प्रधान की नियुक्ति रद्द कर दी।
