{"_id":"6336555b0d52f85d3b37e5c3","slug":"government-submits-report-on-iiit-land-allotment-case-ban-on-construction-near-khandari-reservoir-jabalpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jabalpur: IIIT भूमि आवंटन मामले पर शासन ने पेश की रिपोर्ट, खंदारी जलाशय के पास निर्माण पर लगी रोक बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jabalpur: IIIT भूमि आवंटन मामले पर शासन ने पेश की रिपोर्ट, खंदारी जलाशय के पास निर्माण पर लगी रोक बरकरार
Fri, 30 Sep 2022 08:02 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Fri, 30 Sep 2022 08:02 AM IST
सार
सरकार की तरफ से पेश की गयी रिपोर्ट में बताया गया कि एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए नियम अनुसार जमीन का आवंटन किया गया था। ट्रिपल आईटी को साल 2006 में आवंटित की गयी भूमि का पद नगर वन था।
विज्ञापन
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
जबलपुर में खंदारी जलाशय की संरक्षित भूमि डुमना एयरपोर्ट विस्तारीकरण और ट्रिपल आईटी को प्रदान किए जाने के संबंध में हाईकोर्ट ने शासन से भूमि के संबंध स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। सरकार की तरफ से पेश की गयी रिपोर्ट में बताया गया कि एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए नियम अनुसार जमीन का आवंटन किया गया था। ट्रिपल आईटी को साल 2006 में आवंटित की गयी भूमि का पद नगर वन था। जिसका 2014 भूमि का पद परिवर्तन कर सार्वजनिक व अर्द्ध सार्वजनिक किया गया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 2 जनवरी को निर्धारित की है।
1997 में गढ़ा गौड़वाना संरक्षण समिति व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर के 37 तालाबों में से सात विलुप्त हो गये हैं। दस जल तालाब व्यक्तिगत हैं तथा 20 तालाबों के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार द्वारा सिर्फ 14 जलस्त्रोत के लिए राशि का आवंटन किया गया था। हाईकोर्ट ने साल सितम्बर 2014 में एस्पो को तालाब संरक्षण के लिए निर्देशित किया था। योजना के कार्यवाहन के लिए एस्पो को 6 माह का समय दिया गया था।
वहीं, याचिकाकर्ता कर्नल एके रामनाथन की ओर से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि खंदारी जलाशय से शहर में पानी की जल सप्लाई की जाती है। खंदारी जलाशय कई दशकों से शहर के लोगों की प्यास बुझा रहा है। भारत राजपत्र 1908, खंदारी झील का जलग्रहण क्षेत्र 13.597 वर्ग किमी. जो 3.360 एकड़ के लगभग है। हवाई अड्डा विस्तार सहित परियोजनाओं के लिए खंदारी जलाशय की 40.88 प्रतिशत जमीन आवंटित की गयी है और 59.12 क्षेत्र ही बचा है। इसके अलावा अन्य योजनाओं के तहत नगर निगम जमीन का आवंटन किया गया है, जो प्रारंभ नहीं हुई हैं।
विज्ञापन
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि इन योजनाओं के लिए दूसरी जगह जमीन प्रदान करने के निर्देश जारी किए थे। युगलपीठ ने एस्पो व नीरी को अनावेदक बनाये जाने के आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। युगलपीठ ने डुमना विस्तारीकरण के लिए आवंटित जमीन में ही निर्माण जारी रखने के अलावा अन्य निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। पूर्व सुनवाई के दौरान नीरी की ओर से पेश की गयी रिपोर्ट में बताया गया था कि डुमना क्षेत्र में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी निर्माण का जो दूसरा प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, उसे खंदारी जलाशय के वॉटर कैचमेंट का एरिया आ रहा है। इसके अलावा ट्रिपल आईटी का क्षेत्र भी इस क्षेत्र में आता है। युगलपीठ ने सरकार को डुमना विमानतल के विस्तार के लिए तथा ट्रिपल आईटी को आंवटित की गयी भूमि के संबंध में विवरण पेश करने निर्देश दिए थे। युगलपीठ ने पूर्व में पारित डुमना विमानतल के विस्तारीकरण के अलावा अन्य निर्माण कार्य पर रोक के आदेश को यथावत रखा है।
विज्ञापन
1997 में गढ़ा गौड़वाना संरक्षण समिति व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर के 37 तालाबों में से सात विलुप्त हो गये हैं। दस जल तालाब व्यक्तिगत हैं तथा 20 तालाबों के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार द्वारा सिर्फ 14 जलस्त्रोत के लिए राशि का आवंटन किया गया था। हाईकोर्ट ने साल सितम्बर 2014 में एस्पो को तालाब संरक्षण के लिए निर्देशित किया था। योजना के कार्यवाहन के लिए एस्पो को 6 माह का समय दिया गया था।
विज्ञापन
वहीं, याचिकाकर्ता कर्नल एके रामनाथन की ओर से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि खंदारी जलाशय से शहर में पानी की जल सप्लाई की जाती है। खंदारी जलाशय कई दशकों से शहर के लोगों की प्यास बुझा रहा है। भारत राजपत्र 1908, खंदारी झील का जलग्रहण क्षेत्र 13.597 वर्ग किमी. जो 3.360 एकड़ के लगभग है। हवाई अड्डा विस्तार सहित परियोजनाओं के लिए खंदारी जलाशय की 40.88 प्रतिशत जमीन आवंटित की गयी है और 59.12 क्षेत्र ही बचा है। इसके अलावा अन्य योजनाओं के तहत नगर निगम जमीन का आवंटन किया गया है, जो प्रारंभ नहीं हुई हैं।
विज्ञापन
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि इन योजनाओं के लिए दूसरी जगह जमीन प्रदान करने के निर्देश जारी किए थे। युगलपीठ ने एस्पो व नीरी को अनावेदक बनाये जाने के आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। युगलपीठ ने डुमना विस्तारीकरण के लिए आवंटित जमीन में ही निर्माण जारी रखने के अलावा अन्य निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। पूर्व सुनवाई के दौरान नीरी की ओर से पेश की गयी रिपोर्ट में बताया गया था कि डुमना क्षेत्र में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी निर्माण का जो दूसरा प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, उसे खंदारी जलाशय के वॉटर कैचमेंट का एरिया आ रहा है। इसके अलावा ट्रिपल आईटी का क्षेत्र भी इस क्षेत्र में आता है। युगलपीठ ने सरकार को डुमना विमानतल के विस्तार के लिए तथा ट्रिपल आईटी को आंवटित की गयी भूमि के संबंध में विवरण पेश करने निर्देश दिए थे। युगलपीठ ने पूर्व में पारित डुमना विमानतल के विस्तारीकरण के अलावा अन्य निर्माण कार्य पर रोक के आदेश को यथावत रखा है।
