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Jabalpur News: रैगिंग व कठोर ड्यूटी के कारण छोड़ी थी पीजी मेडिकल सीट, सरकार ने वसूल लिया था 30 लाख का जुर्माना

Sat, 23 Nov 2024 08:33 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sat, 23 Nov 2024 08:33 PM IST
सार

डॉ. राज कुमार अहिरवार ने रैगिंग और कठोर ड्यूटी के कारण पीजी मेडिकल सीट छोड़ी, लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज ने 30 लाख जुर्माना वसूला। हाईकोर्ट ने इसे चुनौती देने पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

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Gave up PG medical seat due to ragging and harsh duty
high court

विस्तार

रैगिंग और कठोर ड्यूटी के कारण मजबूर होकर पीजी मेडिकल सीट छोड़ने वाले डॉक्टर से 30 लाख रुपये जुर्माना वसूलने के मामले में हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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सिहोरा निवासी डॉ. राज कुमार अहिरवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वह अनुसूचित जाति वर्ग से हैं और 2022 में नीट परीक्षा में चयनित हुए थे। उन्हें गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में पीजी पीडियाट्रिक्स की सीट आवंटित हुई थी। दाखिले के समय उन्होंने सीट लिविंग बॉन्ड भी भरा था। याचिका में आरोप लगाया गया कि नवंबर 2022 से जनवरी 2023 तक कॉलेज में उनकी रैगिंग की गई और जूनियर डॉक्टर के रूप में 48 घंटे लगातार ड्यूटी करवाई गई। प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने जनवरी 2023 में सीट छोड़ दी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने मूल दस्तावेज लौटाने के एवज में उनसे 30 लाख रुपये जुर्माने के रूप में वसूल लिए।
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इसलिए वसूला जुर्माना
डॉ. अहिरवार ने याचिका में यह भी कहा कि लोकसभा में मध्यप्रदेश जैसे गरीब राज्य में पीजी सीट छोड़ने पर भारी जुर्माने का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने जुर्माने के इस निर्णय को वापस लेने का निर्देश सरकार को दिया था। सरकार ने 2024 में जुर्माना वसूली का निर्णय वापस भी ले लिया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकार ने 2024 में जुर्माना वसूली का फैसला रद्द किया, लेकिन वह 2022-23 का छात्र होने के कारण उनसे जुर्माना वसूला गया। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन है, जो नागरिकों को समानता और स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है।

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याचिका में कहा गया कि भारी जुर्माने के कारण पहले भी पांच छात्रों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की। हाईकोर्ट की जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने सुनवाई के बाद प्रमुख सचिव, संचालक मेडिकल एजुकेशन और डीन गांधी मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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