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Jabalpur News: दोषसिद्धि के साक्ष्य नहीं होने के कारण एफआईआर निरस्त, व्यापमं प्री मेडिकल टेस्ट 2013 का मामला

Thu, 22 May 2025 10:32 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 22 May 2025 10:32 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने पीएमटी-2013 में आरोपी रामनिवास पटेल के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर निरस्त कर दी। कोर्ट ने पाया कि उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे दोषसिद्धि संभव हो। चार लाख लेने और स्कोरर उपलब्ध कराने के आरोप साबित नहीं हुए, केवल ₹10,000 की जब्ती प्रमाणित है।

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FIR quashed due to lack of evidence of conviction
मप्र हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी)-2013 में रैकेटियर के लिए चार स्कोररों की व्यवस्था करने के आरोप में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने निर्णय सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत एवं न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ ऐसे कोई साक्ष्य नहीं हैं, जिनसे उसकी दोषसिद्धि सिद्ध हो सके। इसके आधार पर कोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने का आदेश दिया।

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यह याचिका राजस्थान के बाड़मेर जिले के निवासी रामनिवास पटेल की ओर से दायर की गई थी। सीबीआई ने उनके खिलाफ विशेष न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण), भोपाल के समक्ष भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 467, 468, 471, 201; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 3(2); शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और 27; तथा आयकर अधिनियम की धारा 66 और 43 के तहत आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। इस प्रकरण में कुल 491 आरोपी बनाए गए हैं।
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रामनिवास पटेल पर आरोप था कि उसने पीएमटी-2013 परीक्षा में रैकेटियर संजीव कुमार शिल्पकार से मिलवाकर चार स्कोररों की व्यवस्था करवाई थी और इसके एवज में चार लाख रुपये लिए थे। बताया गया कि उसने स्कोररों को 40 हजार रुपये, अपने पिता को 20 हजार रुपये दिए थे, जबकि दस हजार रुपये उसके पास से बरामद हुए थे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कपिल शर्मा ने तर्क दिया कि चार्जशीट में ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित होता हो कि याचिकाकर्ता ने आर्थिक लाभ अर्जित किया। स्कोररों या पिता को पैसे देने का भी कोई प्रमाण नहीं है, केवल दस हजार रुपये की जब्ती का साक्ष्य है।

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हाईकोर्ट की युगलपीठ ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इस चरण में एफआईआर को रद्द करने की मांग उचित है क्योंकि प्रस्तुत साक्ष्य दोषसिद्धि की संभावना नहीं दर्शाते। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त करना न्यायसंगत है।

 

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