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Jabalpur News: रादुविवि कुलगुरु पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच एसआईटी करेगी, तीन आईपीएस रहेंगे टीम में
Thu, 22 May 2025 07:17 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 22 May 2025 07:17 PM IST
सार
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु पर यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच में लापरवाही पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया। कोर्ट ने डीजीपी को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। जांच में साक्ष्य छिपाने और प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के प्रयास भी सामने आए।
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महिला अधिकारियों द्वारा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा पर लगाए गए यौन उत्पीड़न की शिकायत पर जारी जांच में लापरवाही को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने तीन सदस्यीय आईपीएस अधिकारियों के एसआईटी गठित करने के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि एसआईटी का गठन प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा तीन दिनों में किया जाए।
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गौरतलब है कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में पदस्थ महिला अधिकारी ने कुलगुरु डॉ. राजेश कुमार वर्मा के खिलाफ कार्यस्थल में यौन शोषण की शिकायत की थी। शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के कारण पीड़ित महिला अधिकारी ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। याचिका में कहा गया था कि 21 नवंबर 2024 को आयोजित मीटिंग के दौरान कुलगुरु ने सबके सामने विपरीत अशोभनीय टिप्पणी करते हुए अभद्र इशारे किए थे। घटना दिनांक की कुलपति कक्ष में लगे सीसीटीवी फुटेज की रिकॉर्डिंग प्रदान करने के लिए उसने सूचना के अधिकार आवेदन किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं करवाई गई।
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पूर्व में हुई याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से एकलपीठ को बताया गया था कि उच्च शिक्षा विभाग ने जांच के लिए छह सदस्यीय का गठन किया है। घटना दिनांक के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा गया है। इसके बाद हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से घटना दिनांक की सीसीटीवी फुटेज जांच कमेटी के समक्ष पेश नहीं किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कमेटी को बताया कि सीसीटीवी में खराबी आने के कारण फुटेज डाउनलोड नहीं हुई है। एकलपीठ ने आदेश के बावजूद भी रिकॉर्डिंग को सुरक्षित नहीं रखे जाने को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को विश्वविद्यालय में लगे कैमरों की जांच फॉरेन्सिक व तकनीकी विशेषज्ञों से करवाने के आदेश जारी किए थे। जिला कलेक्टर द्वारा पेश की गई रिपोर्ट का अवलोकन करने पर एकलपीठ ने पाया था कि उसमें कुलपति के कमरे में घटना के दिन सीसीटीवी कैमरा काम कर रहा था या नहीं, इसका कोई उल्लेख नहीं है।
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एकलपीठ ने कमेटी द्वारा जब्त दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य तत्वों का परीक्षण कर जांच के संबंध में हलफनामा प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे। जिला कलेक्टर ने प्रस्तुत हलफनामा में जांच पर असंतुष्टि व्यक्त की थी। एकलपीठ ने पाया कि जांच कमेटी ने शिकायत की जांच के दौरान साक्ष्य एकत्र करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। समिति के दौरान पेश की गई जांच रिपोर्ट संतोषजनक है। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न संबंधित गंभीर शिकायत के बावजूद मामले की उचित जांच नहीं करवाते हुए अनावेदक अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि जिस व्यक्ति पर पीड़िता ने आरोप लगाए गए हैं, वह प्रभावशील व्यक्ति है और उसके उच्च राजनीतिक संबंध हैं। जांच कमेटी के सदस्य व अनावेदक अधिकारी उसे बचाने का प्रयास कर रहे हैं। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा है कि कमेटी का अध्यक्षता आईजी रैंक के अधिकारी करेंगे और पुलिस अधीक्षक रैंक की एक महिला अधिकारी सदस्य रहेंगी। कमेटी में जबलपुर जिले से किसी को शामिल नहीं किया जाएगा। जांच कमेटी की रिपोर्ट बंद लिफाफे में रखी जाए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
