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MP News: नर्मदा नदी से दूरी तय करने गठित की जाएगी एक्सपर्ट कमेटी, हाईकोर्ट ने दिया तीन माह का समय
Mon, 14 Aug 2023 08:16 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 14 Aug 2023 08:16 PM IST
सार
नर्मदा नदी के तीन सौ मीटर के दायरे में हुए अवैध निर्माणों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सरकार की तरफ से बताया गया कि नदी के किस जल स्तर से तीन सौ मीटर की दूरी निर्धारित की जाए, इस संबंध में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जा रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के तीन सौ मीटर के दायरे में हुए अवैध निर्माणों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि नदी के किस जल स्तर से तीन सौ मीटर की दूरी निर्धारित की जाए, इस संबंध में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जा रहा है। एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दूरी निर्धारित करने पर निर्णय लिया जाएगा। हाईकोर्ट चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ व जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ को सरकार के समय प्रदान करने के आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 12 सितंबर निर्धारित की है।
गौरतलब है कि दयोदय सेवा केन्द्र द्वारा नर्मदा नदी के तीन सौ मीटर दायरे में अवैध रूप से निर्माण कार्य किए जाने का आरोप लगाते हुए नर्मदा मिशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पूर्व मंत्री व भाजपा नेता ओमप्रकाश धुर्वे द्वारा डिण्डौरी में बिना अनुमति नर्मदा नदी के लगभग पचास मीटर के दायरे में बहुमंजिला मकान बनाए जाने को भी चुनौती दी गई थी। इसके अलावा एक अवमानना याचिका सहित तीन अन्य संबंधित मामले को लेकर याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका की सुनवाई के दौरान नगर निगम की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया था कि जबलपुर में साल 2008 के बाद नर्मदा नदी के तीस सौ मीटर दायरे में तिलवाराघाट, ग्वारीघाट, जिलहेरीघाट, रमनगरा, गोपालपुर, दलपतपुर, भेड़ाघाट में कुल 75 अतिक्रमण पाए गए हैं। इसमें से 41 निजी भूमि पर, 31 शासकीय भूमि तथा 3 आबादी भूमि में पाए गए हैं।
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क पेश किया गया था कि नदी के अधिकतम जल भराव क्षेत्र से तीन सौ मीटर का निर्धारण होना चाहिए। सरकार की तरफ से टाउन एंड कंट्री के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा गया कि रिवर बेल्ट से तीन सौ मीटर निर्धारित है। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त जानकारी पेश की गई। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंकित साहू ने पैरवी की।
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गौरतलब है कि दयोदय सेवा केन्द्र द्वारा नर्मदा नदी के तीन सौ मीटर दायरे में अवैध रूप से निर्माण कार्य किए जाने का आरोप लगाते हुए नर्मदा मिशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पूर्व मंत्री व भाजपा नेता ओमप्रकाश धुर्वे द्वारा डिण्डौरी में बिना अनुमति नर्मदा नदी के लगभग पचास मीटर के दायरे में बहुमंजिला मकान बनाए जाने को भी चुनौती दी गई थी। इसके अलावा एक अवमानना याचिका सहित तीन अन्य संबंधित मामले को लेकर याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका की सुनवाई के दौरान नगर निगम की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया था कि जबलपुर में साल 2008 के बाद नर्मदा नदी के तीस सौ मीटर दायरे में तिलवाराघाट, ग्वारीघाट, जिलहेरीघाट, रमनगरा, गोपालपुर, दलपतपुर, भेड़ाघाट में कुल 75 अतिक्रमण पाए गए हैं। इसमें से 41 निजी भूमि पर, 31 शासकीय भूमि तथा 3 आबादी भूमि में पाए गए हैं।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क पेश किया गया था कि नदी के अधिकतम जल भराव क्षेत्र से तीन सौ मीटर का निर्धारण होना चाहिए। सरकार की तरफ से टाउन एंड कंट्री के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा गया कि रिवर बेल्ट से तीन सौ मीटर निर्धारित है। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त जानकारी पेश की गई। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंकित साहू ने पैरवी की।
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