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Jabalpur: लोकतंत्र सेनानी की पत्नी के उपचार व्यय के भुगतान पर विचार करें, कोर्ट का जबलपुर कलेक्टर को निर्देश

Wed, 07 May 2025 09:04 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 07 May 2025 09:04 PM IST
सार

याचिका में कहा गया कि शासन का स्पष्ट प्रावधान है कि मीसाबंदी या उनकी पत्नी को गंभीर बीमारी की स्थिति में चिकित्सा सहायता अनुदान दिया जाएगा। पहले भी जब उनकी मां बीमार थीं, तब उनके इलाज पर हुए खर्च की भरपाई शासन द्वारा की गई थी।

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Consider paying the medical expenses of the wife of a democracy fighter
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लोकतंत्र सेनानी मीसा बंदी की पत्नी के उपचार पर किए गए व्यय की राशि शासन ने इस आधार पर निरस्त कर दी कि संबंधित महिला की मृत्यु हो चुकी है। इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए जबलपुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर 30 दिन के भीतर विचार कर नियमानुसार आदेश पारित करें।

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यह याचिका आदर्श नगर, ग्वारीघाट रोड निवासी अजीत सिंह आनंद ने दायर की थी। उन्होंने बताया कि वह पेशे से ड्राइवर हैं और उनकी मां हरजीत कौर का निधन दिसंबर 2023 में हो गया था। वह लकवे और हृदय रोग से पीड़ित थीं। उनके पति स्व. सरकार भगत सिंह लोकतंत्र सेनानी थे। उनके निधन के बाद हरजीत कौर को मीसाबंदी पेंशन मिलती थी।

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याचिका में कहा गया कि शासन का स्पष्ट प्रावधान है कि मीसाबंदी या उनकी पत्नी को गंभीर बीमारी की स्थिति में चिकित्सा सहायता अनुदान दिया जाएगा। पहले भी जब उनकी मां बीमार थीं, तब उनके इलाज पर हुए खर्च की भरपाई शासन द्वारा की गई थी।

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अक्टूबर 2023 में उनकी तबीयत फिर बिगड़ी और उन्हें लकवा तथा दिल का दौरा पड़ा, जिसके चलते अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अजीत सिंह ने जिला कलेक्टर से चिकित्सा अनुदान के लिए आवेदन किया। उन्होंने दावा किया कि कलेक्टर ने मौखिक रूप से इलाज का खर्च वहन किए जाने का आश्वासन दिया था, जिसके आधार पर उन्होंने कर्ज लेकर मां का उपचार कराया। परंतु इलाज के दौरान 18 दिसंबर 2023 को उनकी मां का निधन हो गया।

बाद में शासन ने मृत्यु का हवाला देते हुए चिकित्सा अनुदान राशि देने से इनकार कर दिया। इस पर अजीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान उन्होंने अपना पक्ष स्वयं रखा। न्यायालय ने याचिका का निराकरण करते हुए कलेक्टर को 30 दिनों में उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

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