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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Call a meeting of all collectors of state and give information about law contained in NSA, MPHC's instructions

Jabalpur News: प्रदेश के सभी कलेक्टर की बैठक बुलाकर रासुका में निहित कानून की जानकारी दें, हाईकोर्ट के निर्देश

Thu, 23 Jan 2025 04:12 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 23 Jan 2025 04:12 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने बुरहानपुर कलेक्टर के जिला बदर आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 के प्रावधानों का सही उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अदालत ने याचिकाकर्ता को ₹50,000 मुआवजा देने और कलेक्टर से वसूली की अनुमति दी। केवल आपराधिक प्रकरणों के आधार पर जिला बदर अनुचित बताया गया। 

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Call a meeting of all collectors of state and give information about law contained in NSA, MPHC's instructions
high court

विस्तार

हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने बुरहानपुर कलेक्टर द्वारा राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 के तहत पारित जिला बदर आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि सभी कलेक्टरों की बैठक बुलाकर अधिनियम के सही इरादे और प्रावधानों को समझाया जाए ताकि भविष्य में वे बिना उचित समझ या राजनीतिक दबाव में आदेश जारी न करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को प्रताड़ना और मुकदमा खर्च के लिए ₹50,000 का मुआवजा देने का निर्देश दिया, जिसे सरकार कलेक्टर से वसूल सकती है।

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याचिका का संदर्भ
याचिकाकर्ता अनंतराम अवासे ने बुरहानपुर कलेक्टर के 23 जनवरी 2024 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ जिला और आसपास के जिलों से एक साल के निर्वासन का आदेश जारी किया गया था। याचिका में तर्क दिया गया कि यह आदेश कानूनी प्रावधानों के विपरीत और बिना साक्ष्य या गवाहों के बयान के पारित किया गया। अपीलकर्ता ने इंदौर संभागायुक्त के समक्ष अपील की थी, जिसे 14 अक्टूबर को खारिज कर दिया गया।

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अदालत का अवलोकन
सुनवाई के दौरान, अदालत ने पाया कि कलेक्टर ने अपने आदेश में 2018 से 2023 के बीच वन अधिनियम के तहत 11 प्रकरणों और 2019 व 2023 में अन्य गंभीर अपराधों का उल्लेख किया। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि वन अधिनियम के मामले राज्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत नहीं आते।

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अदालत ने कहा कि केवल आपराधिक प्रकरण दर्ज होना जिला बदर का आधार नहीं बन सकता। कलेक्टर ने गलत तरीके से वन अधिनियम के प्रकरणों को आधार बनाया और गवाहों से संपर्क की जानकारी भी गलत दी।

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