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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur: There is no provision of third gender in the recruitment application of the High Court, the court gave instructions for the final hearing

जबलपुर: हाईकोर्ट के भर्ती आवेदन में थर्ड जेंडर का प्रावधान नहीं, कोर्ट ने दिए अंतिम सुनवाई के निर्देश

Wed, 06 Apr 2022 08:49 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 06 Apr 2022 08:49 PM IST
सार

हाईकोर्ट में चतुर्थ वर्ग की भर्ती के लिए निकाले गए भर्ती आवेदन में थर्ड जेंडर का प्रावधान नहीं होने के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। बताया गया कि सरकार की तरफ से कोई जवाब पेश नहीं किया गया है। इसके बाद चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पीके कौरव की युगलपीठ ने याचिका पर अंतिम सुनवाई के निर्देश जारी किए हैं। अगली सुनवाई 27 जून को निर्धारित की गई है।
 

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Jabalpur: There is no provision of third gender in the recruitment application of the High Court, the court gave instructions for the final hearing
MP High Court अगली सुनवाई 27 जून को निर्धारित की गई है। - फोटो : Social Media

विस्तार

बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई हुई। ये याचिका हाईकोर्ट में चतुर्थ वर्ग की भर्ती के लिए निकाले गए भर्ती आवेदन में थर्ड जेंडर का प्रावधान नहीं होने के खिलाफ लगाई गई थी। कोर्ट को बताया गया कि सरकार की तरफ से कोई जवाब पेश नहीं किया गया है। इसके बाद चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पीके कौरव की युगलपीठ ने याचिका पर अंतिम सुनवाई के निर्देश जारी किए हैं। अगली सुनवाई 27 जून को निर्धारित की गई है।
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थर्ड जेंडर नूरी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों की भर्ती के संबंध में 26 अक्टूबर 2021 को नोटिफिकेशन जारी किया था। आवेदन ऑनलाइन जमा करना था और अंतिम तिथि 24 नवंबर 2021 थी। याचिकाकर्ता ऑनलाइन आवेदन करने गई तो आवेदन में थर्ड जेंडर का कोई प्रावधान नहीं था। जिसके कारण वह नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर पाई।
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याचिका में कहा गया था कि थर्ड जेंडर भारतीय नागरिक हैं और संविधान में प्रावधान प्राप्त मूलभूर्त अधिकारों के हकदार हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस संबंध में आदेश पारित किए हैं। नौकरी के आवेदन से वंचित किया जाना ट्रांसजेंडर पर्सन प्रोटेक्शन एंड राइट एक्ट 2019 के विपरीत है। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सरकार की तरफ से जवाब पेश नहीं किया गया है। जिसके बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता संध्या रजक ने पैरवी की। 
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