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जबलपुर: तकनीकी शिक्षा विभाग ने बना दिए मेडिकल शिक्षा विभाग के लिए नियम, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Fri, 21 Jan 2022 10:32 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 21 Jan 2022 10:32 PM IST
सार

मेडिकल एजुकेशन में दाखिले के लिए तकनीकि शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा नियम बनाये जाने को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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Jabalpur: Technical Education Department made rules for Medical Education Department High Court sought answer
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेडिकल एजुकेशन में दाखिले के लिए तकनीकि शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा नियम बनाये जाने को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि यह मध्य प्रदेश शासन कार्य आवंटनद्ध नियम के खिलाफ है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुनीता यादव ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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याचिकाकर्ता अधिवक्ता देवाशीष दुबे की तरफ से याचिका दायर की गई थी, जिसमें  कहा गया था कि मध्य प्रदेश शासन कार्य आवंटन नियम के तहत मेडिकल एजुकेशन में प्रवेश का कार्य मेडिकल शिक्षा विभाग के अधीन आता है। मेडिकल एजुकेशन विभाग ने 9 मार्च 2017 को प्राईवेट मेडिकल एण्ड डेंटल कॉलेज के लिए नियम बनाये थे। इसके बाद तकनीकि शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग ने मध्य प्रदेश विनियम एवं शुल्क निर्धारण अधिनियम 2007 में संशोधन संबंधित नोटिफिकेशन 19 मार्च 2017 को जारी किया था। इस अधिनियम में शासकीय व प्राईवेट मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज को शामिल कर लिया गया था।
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याचिका में कहा गया था कि अवैधानिक तौर पर बनाये गये नियमों का चिकित्सा शिक्षा विभाग पालन कर रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले कॉलेज के संबंध में तकनीकि शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग नियम नहीं बना सकता है। मध्य प्रदेश शासन कार्य आवंटनद्ध नियम के तहत संबंधित विभाग को अपने नियम बनाने का अधिकार है। इसलिए यह मध्य प्रदेश शासन कार्य आवंटनद्ध नियम के विपरित व असंवैधानिक है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांग है।
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