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जबलपुर: 6 जिला न्यायालय में स्थायी पुलिस चौकियां, जजों की सुरक्षा के मामले में हाईकोर्ट सख्त
Thu, 17 Feb 2022 07:55 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 17 Feb 2022 07:55 PM IST
सार
सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में 52 में से 6 जिला न्यायालय में स्थायी पुलिस चौकियां हैं। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस एमएस भट्टी की युगलपीठ ने स्टेटस रिपोर्ट के संबंध में हाईकोर्ट प्रशासन तथा इंटरविनर को जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।
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Jabalpur High Court
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मंदसौर के एक जज के साथ हुई अभद्रता की घटना को संज्ञान में लेते हुए न्यायालयों, न्यायिक अधिकारियों व कर्मियों और परिसर की सुरक्षा के संबंध में जनहित याचिका के रूप में सुनवाई जारी है। सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में 52 में से 6 जिला न्यायालय में स्थायी पुलिस चौकियां हैं। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस एमएस भट्टी की युगलपीठ ने स्टेटस रिपोर्ट के संबंध में हाईकोर्ट प्रशासन तथा इंटरविनर को जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि 23 जुलाई 2016 को न्यायिक अधिकारी राजवर्धन गुप्ता के साथ मंदसौर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर अभ्रदता करके उनके साथ झूमाझटकी की गई थी। जिस पर हाईकोर्ट के तत्कालीन रजिस्ट्रार जनरल मनोहर ममतानी ने पहले प्रारंभिक जांच कराई। प्रारंभिक जांच, समाचार पत्र की संबंधित खबरों, वीडियो क्लिपिंग्स और अन्य साक्ष्यों से गुप्ता पर हुए हमलों की पुष्टि होने पर रजिस्ट्रार जनरल ने पूरा मामला तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेन्द्र मेनन के समक्ष पेश किया था। पूर्व में दिए गए आदेशों के बाद भी इस तरह की घटना होने पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के निर्देश दिए थे।
याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश के न्यायालय परिसर में पर्याप्त ऊंचाई की बाउंड्रीवॉल तथा पुलिस चौकियां की स्थापना, आवासिय परिसर में न्यायिक अधिकारियों व उनके परिवार की सुरक्षा तथा न्यायालय में सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। इसमें कहा गया है कि प्रदेश के 45 जिला न्यायालय में पर्याप्त ऊंचाई की बाउंड्रीवॉल है। तीन जिला न्यायालय में बाउंड्रीवॉल की ऊंचाई पर्याप्त नहीं है तथा चार जिला न्यायालय में बाउंड्रीवॉल नहीं है। इसके अलावा प्रदेश के 6 जिला न्यायालय में स्थायी तथा 6 जिला न्यायालय में अस्थायी पुलिस चौकियां हैं। आवासीय परिसर में न्यायिक अधिकारियों व उनके परिवार की सुरक्षा के लिए 75 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया है। युगलपीठ ने गुरुवार को सुनवाई के बाद उक्त निर्देश जारी किए। सुनवाई के दौरान इंटरविनर के रूप में अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने पक्ष रखा।
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बता दें कि 23 जुलाई 2016 को न्यायिक अधिकारी राजवर्धन गुप्ता के साथ मंदसौर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर अभ्रदता करके उनके साथ झूमाझटकी की गई थी। जिस पर हाईकोर्ट के तत्कालीन रजिस्ट्रार जनरल मनोहर ममतानी ने पहले प्रारंभिक जांच कराई। प्रारंभिक जांच, समाचार पत्र की संबंधित खबरों, वीडियो क्लिपिंग्स और अन्य साक्ष्यों से गुप्ता पर हुए हमलों की पुष्टि होने पर रजिस्ट्रार जनरल ने पूरा मामला तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेन्द्र मेनन के समक्ष पेश किया था। पूर्व में दिए गए आदेशों के बाद भी इस तरह की घटना होने पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के निर्देश दिए थे।
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याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश के न्यायालय परिसर में पर्याप्त ऊंचाई की बाउंड्रीवॉल तथा पुलिस चौकियां की स्थापना, आवासिय परिसर में न्यायिक अधिकारियों व उनके परिवार की सुरक्षा तथा न्यायालय में सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। इसमें कहा गया है कि प्रदेश के 45 जिला न्यायालय में पर्याप्त ऊंचाई की बाउंड्रीवॉल है। तीन जिला न्यायालय में बाउंड्रीवॉल की ऊंचाई पर्याप्त नहीं है तथा चार जिला न्यायालय में बाउंड्रीवॉल नहीं है। इसके अलावा प्रदेश के 6 जिला न्यायालय में स्थायी तथा 6 जिला न्यायालय में अस्थायी पुलिस चौकियां हैं। आवासीय परिसर में न्यायिक अधिकारियों व उनके परिवार की सुरक्षा के लिए 75 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया है। युगलपीठ ने गुरुवार को सुनवाई के बाद उक्त निर्देश जारी किए। सुनवाई के दौरान इंटरविनर के रूप में अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने पक्ष रखा।
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