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जबलपुर: 19 वर्ष के आयु में शादी की जल्दबाजी, हाईकोर्ट ने दिए युवती की काउंसलिंग के निर्देश
Mon, 14 Feb 2022 07:04 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 14 Feb 2022 07:04 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने 19 साल की युवती के शादी के निर्णय में जल्दबाजी पर पुनः विचार करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। याचिका पर अगली सुनवाई 17 फरवरी को निर्धारित की गई है।
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Jabalpur High Court
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान वीडियो क्रॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित युवती ने हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू व जस्टिस सुशीला यादव को बताया कि उसे मर्जी के खिलाफ नारी निकेतन में जबरदस्ती रखा गया है। वह याचिकाकर्ता से प्रेम करती है और वह अपना धर्म परिवर्तन कर उससे शादी करेगा। युगलपीठ ने पाया कि युवती की उम्र महज 19 साल है और भविष्य के संबंध में उसे विचार करना चाहिए। शादी के निर्णय में जल्दबाजी पर पुनः विचार करने के लिए तीन दिन का समय प्रदान करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 17 फरवरी को निर्धारित की गई है।
होशंगाबाद निवासी इटारसी निवासी फैसल खान की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि उसकी प्रेमिका जो हिन्दू है, उसे जबरदस्ती नारी निकेतन में रखा गया है। वह एक दूसरे से प्रेम करते हैं और युवती की उम्र 19 वर्ष है। वह पूरी तरह से बालिग है और जनवरी के पहले सप्ताह में वह अपना घर छोड़कर उसके साथ रहने लगी थी। लापता होने की रिपोर्ट युवती के पिता ने पुलिस में दर्ज करवाई थी। जिसके बाद दोनों ने थाने में उपस्थित होकर बताया था कि वह स्वैच्छा से एक दूसरे के साथ रहना चाहते हैं।
पुलिस में बयान दर्ज करवाने के बाद वे भोपाल आकर रहने लगे थे। इटारसी पुलिस ने फरवरी के पहले सप्ताह में एसडीएम के समक्ष वयान दर्ज करवाने के लिए उन्हें बुलाया था। एसडीएम के समक्ष बयान दर्ज करवाने के बाद पुलिस ने बिना किसी आदेश के जबरदस्ती युवती को नारी निकेतन भेज दिया था। जिसके खिलाफ उक्त बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने युवती को वीडियो क्रॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित करने के निर्देश जारी किए थे।
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याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युवती युगलपीठ के समक्ष उपस्थित हुई। युवती ने युगलपीठ को बताया कि जबरदस्ती नारी निकेतन में रखा गया है। वह अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता के साथ थी और वह हिन्दू धर्म अपनाकर उसके साथ शादी करेगा। महज 19 साल की उम्र में शादी के लिए जल्दीबाजी पर युगलपीठ ने युवती को पुन: विचार करने का समय प्रदान किया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता मोहम्मद रिजवान खान ने पैरवी की।
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होशंगाबाद निवासी इटारसी निवासी फैसल खान की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि उसकी प्रेमिका जो हिन्दू है, उसे जबरदस्ती नारी निकेतन में रखा गया है। वह एक दूसरे से प्रेम करते हैं और युवती की उम्र 19 वर्ष है। वह पूरी तरह से बालिग है और जनवरी के पहले सप्ताह में वह अपना घर छोड़कर उसके साथ रहने लगी थी। लापता होने की रिपोर्ट युवती के पिता ने पुलिस में दर्ज करवाई थी। जिसके बाद दोनों ने थाने में उपस्थित होकर बताया था कि वह स्वैच्छा से एक दूसरे के साथ रहना चाहते हैं।
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पुलिस में बयान दर्ज करवाने के बाद वे भोपाल आकर रहने लगे थे। इटारसी पुलिस ने फरवरी के पहले सप्ताह में एसडीएम के समक्ष वयान दर्ज करवाने के लिए उन्हें बुलाया था। एसडीएम के समक्ष बयान दर्ज करवाने के बाद पुलिस ने बिना किसी आदेश के जबरदस्ती युवती को नारी निकेतन भेज दिया था। जिसके खिलाफ उक्त बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने युवती को वीडियो क्रॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित करने के निर्देश जारी किए थे।
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याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युवती युगलपीठ के समक्ष उपस्थित हुई। युवती ने युगलपीठ को बताया कि जबरदस्ती नारी निकेतन में रखा गया है। वह अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता के साथ थी और वह हिन्दू धर्म अपनाकर उसके साथ शादी करेगा। महज 19 साल की उम्र में शादी के लिए जल्दीबाजी पर युगलपीठ ने युवती को पुन: विचार करने का समय प्रदान किया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता मोहम्मद रिजवान खान ने पैरवी की।
