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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur: Court sentenced for fraud, instead of the guilty put the innocent in jail, after coming out the victims complained

ये भी गजब है: धोखाधड़ी केस में फर्जीवाड़ा, दोषियों की जगह निर्दोषों को ठूंस दिया जेल में, छूटते ही पीड़ितों ने की शिकायत

Fri, 15 Apr 2022 02:12 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 15 Apr 2022 02:12 PM IST
सार

धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को सजा से दंडित किया था। दंडित आरोपियों के स्थान पर तीन निर्दोष व्यक्तियों को जेल भेज दिया गया। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस से मामले की शिकायत की है। जांचकर्ता अधिकारी ने प्रारंभिक तौर पर शिकायत को सही बताया है।
 

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Jabalpur: Court sentenced for fraud, instead of the guilty put the innocent in jail, after coming out the victims complained
जबलपुर एसी ऑफिस में अब शिकायत की गई है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

धोखाधड़ी के केस में दोषियों को जेल भेजने में ही धोखाधड़ी हो गई। दंडित आरोपियों के स्थान पर तीन निर्दोष व्यक्तियों को जेल भेज दिया गया। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस से मामले की शिकायत की है। जांचकर्ता अधिकारी ने प्रारंभिक तौर पर शिकायत को सही बताया है।
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पीड़ित कोमल पांडे (45) ने पुलिस अधीक्षक जबलपुर सिध्दार्थ बहुगुणा से शिकायत की थी कि ठेकेदार अमित खम्परिया ने कान्हा में वन विभाग का नाका साल 2011 में लिया था। टोल नाका में पर्यटकों से अधिक शुल्क लिया जाता था। अधिक शुल्क की राशि को मार्कर से मिटा कर सही कर दिया जाता था। शिकायत पर मंडला जिले के खटिया थाना में ठेकेदार अमित खम्परिया, उसके पिता सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। 
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पीड़ित ने बताया कि आरोपियों को प्रकरण में जमानत मिल गई थी। अमित खम्परिया उसे तथा अन्य 3 लोगों को लेकर 15 सितंबर 2021 को नैनपुर कोर्ट पहुंचा था और कोर्ट रूम में कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। अमित खम्परिया उन्हीं लोगों को लेकर 22 सितंबर 2021 को नैनपुर कोर्ट पहुंचा। नैनपुर कोर्ट के एडीजे ने धोखाधड़ी के मामले में तीन लोगों को पांच-पांच साल की सजा से दंडित किया। प्रकरण में आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि 6 व्यक्ति फरार थे।
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पीड़ित ने बताया कि ठेकेदार के पिता अनिरुध्द प्रताप सिंह (70) के स्थान पर पुलिस उसे न्यायालय से जेल ले गई। इसके अलावा दो फरार व्यक्तियों के स्थान पर दो अन्य व्यक्तियों को जेल ले जाया गया। पुलिस ने तीनों को जेल भेजने से पहले किसी का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन नहीं किया, जिस कारण असली अपराधियों की जगह निर्दोष जेल चले गए। प्रकरण में 84 दिनों बाद उसे हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिला। जेल से आने के बाद वह घर पर रहा। चार माह बाद मनोस्थिति ठीक होने पर शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायती आवेदन से अब पता चला है कि अमित खंपरिया ने पिता अनिरुद्ध प्रसाद सिंह चतुर्वेदी समेत तीनों आरोपियों को बचाने के लिए साजिश रची। कोर्ट में पिता अनिरुद्ध की जगह कोमल प्रसाद पांडे, रामजी द्विवेदी की जगह श्यामसुंदर खंपरिया और दशरथ प्रसाद तिवारी के बजाय विराट तिवारी को कोर्ट में पेश कर दिया।


जबलपुर एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा का कहना है कि मामला गंभीर है। किसी को धोखे या धमकी से जेल भिजवाना गंभीर बात है। पूरे मामले की जांच ट्रेनी आईपीएस प्रियंका शुक्ला कर रही हैं। इस मामले को लेकर मंडला पुलिस से भी बात की जाएगी।
 
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