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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   The 276-year-old temple of Ashtabhuja Mata, built in the enclosure of Lambhate in Gautampura.

इंदौर के शक्ति स्थल: 276 वर्ष पुराना है गौतमपुरा में लांभाते के बाड़े में बना अष्टभुजा माता का मंदिर

Sat, 27 Sep 2025 06:01 AM IST
Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Sat, 27 Sep 2025 06:01 AM IST
सार

इंदौर के गौतमपुरा में स्थित 276 वर्ष पुराना अष्टभुजा माताजी का मंदिर मल्हारराव होलकर के कार्यकाल (1750) में सरदार लांभाते द्वारा स्थापित किया गया था। मंदिर का नामकरण गौतमा बाई होलकर के नाम पर हुआ। आज भी लांभाते परिवार इसकी पूजा करता है और नवरात्र पर विशेष श्रद्धालु जुटते हैं। 

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The 276-year-old temple of Ashtabhuja Mata, built in the enclosure of Lambhate in Gautampura.
गौतमपुरा में लांभाते के बाड़े में बना अष्टभुजा माता का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नगर के विकास के जन्म और नाम कहानी कान्ह नदी के किनारे पंढरीनाथ मंदिर के पीछे स्थित इंद्रेश्वर महादेव मंदिर से आरंभ होती है। इंदौर की स्थापना का वर्ष 1731-1735 के मध्य माना जाता है। इसके करीब 15 वर्ष बाद वर्ष 1750 में इसी क्षेत्र के गौतमपुरा में अष्टभुजा माताजी का मंदिर स्थापित हुआ था। इस तरह इंदौर का यह 276 वर्ष प्राचीन मंदिर जूनी इंदौर में कान्ह और सरस्वती नदी के समीप है। शिव और गणेश के मंदिरों के साथ पंढ़रीनाथ नाथ मंदिर के सामने यह अष्टभुजा देवी का मंदिर है, जो गली के अंदर होने से जनसामान्य की नजर में नहीं आता है।
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कौन थीं गौतम बाई 
इंदौर में होलकर राज्य के संस्थापक मल्हारराव होलकर  (1728-1766) का विवाह भोजराज बारगल की पुत्री गौतमा बाई से हुआ था। गौतमा बाई होलकर एक कुशल प्रशासक थीं। गौतमा बाई का निधन 1761 में हो गया था। मल्हारराव होलकर प्रथम की बड़ी बेटी राजकुमारी सीताबाई का विवाह सरदार विसाजी लांभाते के पुत्र सुल्तान लांभाते से हुआ था। लांभाते परिवार को कुछ गांवों की जागीर मल्हाराव होलकर ने प्रदान की थी। इस बात का उल्लेख 1908 में प्रकाशित कैप्टन सी. ई. लुआर्ड के जिला गजेटियर में है। इन्हीं सरदार लांभाते का गौतमपुरा क्षेत्र में बाड़ा है। गौतमपुरा का नामकरण गौतमा बाई के नाम पर किया गया था। 
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सूबेदार मल्हारराव होलकर के कार्यकाल में बना मंदिर
गौतमपुरा क्षेत्र में सरदार लांभाते के बाड़े में 1750 में प्राचीनतम अष्टभुजा देवी की प्रतिमा, जो करीब चार फीट ऊंची है पत्थर पर उकेरी गई। अष्टभुजा वाली माताजी जी के  हाथों में शस्त्र की कृति निर्मित की गई है। इस तरह यह मंदिर इंदौर राज्य के संस्थापक सूबेदार मल्हारराव होलकर के कार्यकाल में स्थापित हुआ है। 


होलकर राजवंश और मंदिर 
होलकर राजवंश के सरदार लाभांते ने देवी की स्थापना  राजवंश की उन्नति के लिए की थी। उन्हें रियासत का पूर्ण संरक्षण था। शिवाजीराव होलकर (कार्यकाल- 1886-1903)  ने 1893 में देवी मंदिर की पूजा खर्च के लिए सरकारी खजाने से व्यय की स्वीकृति प्रदान की थी। इसका उल्लेख  रिपोर्ट ऑन द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ होलकर स्टेट में है। सरदार लांभाते के राजपरिवार से जुड़े होने के कारण महाराजा होलकर और परिवार की कई महिलाएं दर्शन के लिए यहां आया करती थीं।  

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अब सुजाता लांभाते निभा रहीं पूजा का दायित्व
गौतमपुरा में स्थित देवी की पूजा से खुशहाली और पराक्रम प्राप्त होता है ऐसी मान्यता है। सामान्य दिनों में मंदिर सुबह-शाम खुलता है। नवरात्र में विशेष पूजा और अनुष्ठान होते हैं।  मंदिर में अधिकतर महाराष्ट्रीयन परिवार पूजन के लिए आते हैं। मंदिर अब नए निर्मित भवन में उसी स्थान पर फिर बनाया गया है। मंदिर की पूजा और सेवा का दायित्व लांभाते परिवार द्वारा ही किया जाता है। परिवार के प्रमुख अरुण लांभाते ने लंबे समय तक पूजन का दायित्व निभाया। वर्तमान में अष्टभुजा माताजी  के पूजन का दायित्व परिवार की बहू सुजाता लांभाते निभा रही हैं। नवरात्र में आसपास के क्षेत्रों के अलावा मराठी परिवार के कई भक्त दर्शन के लिए आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं।
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