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MP Election 2023: पटवारी को जातिगत समीकरणों पर भरोसा, वर्मा को शहरी इलाके से उम्मीद

Mon, 06 Nov 2023 02:02 PM IST
Abhishek Chendke अभिषेक चेंडके
Updated Mon, 06 Nov 2023 02:02 PM IST
सार

कांग्रेस प्रत्याशी जीतू पटवारी की गिनती प्रदेश के बड़े नेताओं में होती है। इस बार चुनाव में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। वही, यह चुनाव उम्र की 70 साल के पड़ाव में दोबारा टिकट पाने वाले मधु वर्मा के राजनीतिक कैरियर की मंजिल तय करने वाला है।

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MP Election 2023: Patwari believes in caste equations, Verma has hope from urban areas
दोनो उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा दांव पर। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

15 साल पहले परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इंदौर जिले की राऊ विधानसभा सीट पर इस बार टक्कर बराबरी की है। उम्मीदवार भले ही दोनों दलों ने नहीं बदले, लेकिन माहौल दोनों का एक जैसा है। इस चुनाव में किसी एक का पलड़ा भारी नहीं माना जा सकता है। रस्साकशी दोनों तरफ से पूरी ताकत से हो रही है।

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कांग्रेस प्रत्याशी जीतू पटवारी की गिनती प्रदेश के बड़े नेताओं में होती है। इस बार चुनाव में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। वहीं, यह चुनाव उम्र के 70 साल के पड़ाव में दोबारा टिकट पाने वाले मधु वर्मा के राजनीतिक कैरियर के लिए मायने रखता है। उनके लिए करो या मरो जैसी स्थिति है। 
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आधे-आधे बंटे इस विधानसभा क्षेत्र में पटवारी को जातिगत समीकरणों से उम्मीद है तो वर्मा को शहरी वार्डों पर भरोसा है। ग्रामीण क्षेत्र में खाती समाज का तगड़ा वोटबैंक है और पटवारी भी उसी समाज से है, जबकि शहरी वार्डों में मराठीभाषी और सिख समाज के वोटर ज्यादा हैं, जो परंपरागत रूप से भाजपा का वोटबैंक माना जाता है।
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3.56 लाख मतदाता इस क्षेत्र में हैं। डेढ़ लाख मतदाता शहरी आठ वार्डों के निवासी हैं। इनमें राजेंद्र नगर, विष्णु पुरी, बिजलपुर बिचौली जैसे इलाके शामिल हैं। तीन चुनावों में से दो चुनाव इस सीट पर कांग्रेस ने जीते और एक भाजपा ने। पिछला चुनाव भाजपा प्रत्याशी मधु वर्मा 5 हजार वोटों के अंतर से हारे थे। तब उन्हें शहरी वार्डों से कम वोट मिले थे। कुछ समाजों की नाराजगी भी वर्मा को भारी पड़ी थी।

दोनों ही उम्मीदवार पूरे समय रहे सक्रिय
इस सीट पर चुनाव इसलिए भी रोचक है, क्योंकि दोनों उम्मीदवार सक्रियता की कसौटी पर पांच साल खरे उतरे हैं। पटवारी रोज सुबह सायकल लेकर विधानसभा के क्षेत्रों का भ्रमण कर रहवासियों से मिलते जुलते रहे हैं और लोगों से इमोश्नल अटैचमेंट रखने की कोशिश भी करते रहे हैं, जबकि वर्मा हार के बाद घर नहीं बैठे। पांच साल गली मोहल्ले नाप और नगर निगम के कामों को भी भुनाने की पूरी कोशिश की।


तिल्लौर क्षेत्र के मनोज पाटीदार कहते हैं कि वर्मा हमारे गांव में लगातार आते रहे और लोगों के काम भी कराए। उन्होंने जनता के बीच अपनी पैठ बनाई है। राऊ के निवासी मोहनलाल यादव ने कहा कि पटवारी के पास लोग काम लेकर जाते हैं तो वे अच्छी तरह से बात सुनते हैं और काम भी कराते हैं। लोगों को उनकी बातें प्रभावित करती हैं। यह उनके व्यक्तित्व की खासियत है। बिचौली क्षेत्र के किसान खुमान सिंह पटेल ने कहा कि कुछ भी कहा नहीं जा सकता कि कौन जीतेगा। दोनों उम्मीदवार काफी सक्रिय रहे हैं।

जीतू पटवारी, कांग्रेस प्रत्याशी
प्लस पाइंट

- प्रदेश के बड़े नेता है। भाषण शैली से लोग प्रभावित हो जाते हैं।
-खाती समाज से आते हैं। समाज का ग्रामीण क्षेत्रों में वोटबैंक है।
- चुनावी मैनेजमेंट में माहिर, मुस्लिम वोटबैंक भी मददगार

मायनस पाइंट
-10 साल से लगातार विधायक, एंटी इकंमबेंसी का खतरा
- विधानसभा क्षेत्र में बड़े विकास के काम नहीं करा पाए।
- नगर निगम चुनाव में आठ में दो वार्ड ही कांग्रेस जीत पाई
 
मधु वर्मा, भाजपा प्रत्याशी
प्लस पाइंट

- आईडीए के अध्यक्ष रहते कराए कामों के कारण अलग इमेज बनी।
- राऊ के छह वार्डों में भाजपा के पार्षद, उन वार्डों के कामों को भुनाया।
-भाजपा के परंपरागत वोटबैंक मददगार साबित होगा
मायनस पाइंट
- कांग्रेस प्रत्याशी की तुलना में उम्र ज्यादा, भाषण शैली में कमजोर।
- चुनाव लड़ने का कम अनुभव, चुनाव मैनेजमेंट में कमजोर।
- वर्मा मुराई समाज से हैं। समाज के वोटर विधानसभा में कम हैं।

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