Indore News:ग्वालियर जज के वाहन लूट केस में लगी याचिका पर सुनवाई, मेयर की याचिका को कोर्ट ने माना मानवीय
मेयर ने कहा कि कानून में प्रावधान है कि किसी की जान बचाने के लिए किया गया काम अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। याचिका में यह भी मांग की गई कि प्रोटोकॉल वाहन और सरकारी वाहनों का उपयोग संकट की घड़ी में करने के निर्देश दिए जाए।
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ग्वालियर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो छात्र नेताओं पर प्रकरण दर्ज होने के मामले में मेयर पुष्य मित्र भार्गव द्वारा लगाई गई याचिका में मंगलवार को सुनवाई हुई। ग्वालियर हाईकोर्ट में लगाई याचिका में मेयर ने अपनी तरफ से बात रखी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस रोहित आर्य ने इसे मानवीय कदम बताया। कोर्ट ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर कुछ सवाल भी पूछे। मेयर ने याचिका में प्रदेश के प्रमुख सचिव, एसपी ग्वालियर और थाना प्रभारी को प्रतिवादी बनाया है।
दिसंबर माह में ट्रेन में झांसी के एक विश्वविद्यालय के कुलपति की तबीयत बिगड़ने पर दोनों छात्र नेता ग्वालियर स्टेशन पर खड़ी जज की कार छीन कर ले गए थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लूट की धाराएं लगाई थी। तब इस मामले में इंदौर के मेयर और पूर्व अतिरिक्त महाअधिवक्ता पुष्य मित्र भार्गव ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की।
जिसमें छात्र नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने की गुहार लगाई गई थी,क्योकि धारा 81 की श्रेणी में आने से अपराध परिभाषित नहीं होता। मेयर ने कहा कि कानून में प्रावधान है कि किसी की जान बचाने के लिए किया गया काम अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।
याचिका में यह भी मांग की गई कि प्रोटोकॉल वाहन और सरकारी वाहनों का उपयोग संकट की घड़ी में करने के निर्देश दिए जाएं, अन्यथा समाज में दूसरों की मदद का भाव कम होगा। अब अगली सुनवाई पर संबंधित विभाग अपने जवाब पेश करेंगे।
