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Indore: गीतकार स्वानंद किरकिरे ने कहा- मुझे अपभ्रंश शब्दों से परहेज नहीं, वे भी दिल से निकलते हैं

Tue, 07 Jan 2025 08:53 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 07 Jan 2025 08:53 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने के सवाल पर स्वानंद ने कहा कि मध्य प्रदेश में फिल्म सिटी से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री के लिए ईको सिस्टम जरुरी है। उज्जैन,इंदौर में काफी फिल्में बनने लगी हैै। चंदेरी में तो अब काफी फिल्मों की शूटिंग हो रही है। 

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Indore: Lyricist Swanand Kirkire said- I don't mind using Apabhramsha words, they also come from the heart
स्वानंद किरकिरे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मशहूर गीतकार व अभिनेता स्वानंद किरकिरे का कहना है कि भाषा बहती नदी सी होती है। उसमें सब कुछ समाहित होता है। वे भाषाएं सूख जाती हैं, जो समय के साथ बहती नहीं, खुद में बदलाव नहीं लाती हैं। हमेशा भाषा नए शब्दों को अपनाती है। भाषाओं के आसपास बोलियां भी रहती हैं।

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किरकिरे ने कहा कि हम मालवी भाषा को ही देखें तो इंदौर जिले की मालवी अलग है, देवास और रतलाम जिले की मालवी बोली अलग है। मालवा में ही मालवी भाषा बदल जाती है। भारत तो फिर बड़ा देश है। यहां कई भाषाएं है। अपभ्रंश शब्द बोलियों से आते हैं। मुझे उनसे परहेज नहीं है, लोग चाहे जो बोलें। दिल से जो निकलता है, वही दिल को अच्छा लगता है। इंदौर यात्रा के दौरान वे अपने स्कूल बाल विनय मंदिर भी गए और पुराने दिनों को याद किया।
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जो भी सीखा मालव माटी से सीखा
इंदौर से मुंबई तक के अपने सफर के बारे में उन्होंने कहा कि बचपन मेरा इंदौर में बीता। जिंदगी मेरे साथ ठीक-ठाक रही, ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा। जो भी सीखा इस मालवा की मिट्टी से ही सीखा है। उसे लेकर ही आगे बढ़े। फिल्म निर्देशन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि फिल्म का निर्देशन मेरी इच्छा है, लेकिन मेरी प्लानिंग से कुछ नहीं होता। सब ईश्वर की मर्जी है। वो जब चाहेगा तो निर्देशक भी बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि गीत दिल और दिमाग दोनों से लिखे जाते हैं। जैसे दूसरे काम होते हैं, वैसे ही गीत लिखना भी एक काम है।

फिल्म इंडस्ट्री का इको सिस्टम जरूरी
मध्य प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में फिल्म सिटी से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री के लिए इको सिस्टम जरूरी है। उज्जैन, इंदौर में काफी फिल्में बनने लगी हैं। चंदेरी में तो अब काफी फिल्मों की शूटिंग हो रही है। राज्य सरकारें शूटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए पाॅलिसी बनाती है। मध्य प्रदेश में भी पाॅलिसी बनी है। इससे रोजगार बड़े पैमाने पर मिलता है।
 

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