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Indore Bawadi Accident: सुसाइड पाइंट थी मंदिर की बावड़ी, 40 साल पहले निगम ने ही बंद करवाई, 36 जानें चली गई
Fri, 31 Mar 2023 06:45 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 31 Mar 2023 06:45 PM IST
सार
इंदौर के बेलेश्वर महादेव मंदिर में हुए हादसे में निगम और स्थानीय नेताओं की भूमिका पर उठ रहे सवाल
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इंदौर बावड़ी हादसा
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
इंदौर में गुरुवार को हुए भयावह हादसे में नगर निगम और स्थानीय नेताओं की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि जिस बावड़ी की छत धंसकने 36 लोगों की मौत हुई, उसे नगर निगम ने ही 40 साल पहले बंद कराया था। 1980 से 85 के आसपास यह सुसाइड पाइंट हुआ करता था। इंदौर के बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में हुए हादसे में 36 लोगों की जान चली गई है।
मंदिर ट्रस्ट के सहासचिव लक्ष्मीकांत पटेल का कहना है कि 1980 से 85 के बीच यहां पर कई लोगों ने सुसाइड कर लिया था। एक बुजुर्ग और बच्चा भी यहां पर डूब गए थे। उस वक्त कोई पंचनामा बनाया जाता था तो हमसे गवाही ली जाती थी। उस वक्त आईडीए का नाम इंप्रूवमेंट ट्रस्ट था। तब हमने वहां पर इसकी शिकायत की। इसके बाद नगर निगम ने बावड़ी को बंद करवाया था और स्लैब डलवा दी थी। पटेल ने इस हादसे में अपनी पत्नी दक्षाबेन पटेल और बहू कनक को खो दिया है।
पहली बार मंदिर के अंदर हवन करना पड़ गया भारी
लक्ष्मीकांत ने बताया कि 1970 में यहां पर गिनती के दो या तीन मकान थे। मंदिर की जगह सिर्फ ओटला था और पास में बावड़ी थी। बाद में यहां पर मंदिर बन गया। अब नया मंदिर बन रहा था। अगले साल महादेव मंदिर की मूर्तियों को इसी नए मंदिर में शिफ्ट करना था। इसी वजह से सभी ने कहा कि इस बार बाहर निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए हवन पूजन मंदिर के अंदर ही कर लिया जाए। इसी कारण पहली बार मंदिर के अंदर हवन पूजन किया जा रहा था और हादसा हो गया।
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काम रुकवाने के झगड़े में 20 साल पहले दर्ज हुआ था केस
मंदिर का काम रुकवाने के लिए 20 साल पहले झगड़ा हुआ था। इसमें भी मारपीट का केस दर्ज किया गया था। तब मंदिर के वर्तमान अध्यक्ष सेवाराम गलानी और स्थानीय रहवासी कांतिभाई पटेल के बीच यह विवाद हुआ था। उस वक्त रहवासी मंदिर के नाम पर हो रहे अतिक्रमण का विरोध कर रहे थे।
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मंदिर ट्रस्ट के सहासचिव लक्ष्मीकांत पटेल का कहना है कि 1980 से 85 के बीच यहां पर कई लोगों ने सुसाइड कर लिया था। एक बुजुर्ग और बच्चा भी यहां पर डूब गए थे। उस वक्त कोई पंचनामा बनाया जाता था तो हमसे गवाही ली जाती थी। उस वक्त आईडीए का नाम इंप्रूवमेंट ट्रस्ट था। तब हमने वहां पर इसकी शिकायत की। इसके बाद नगर निगम ने बावड़ी को बंद करवाया था और स्लैब डलवा दी थी। पटेल ने इस हादसे में अपनी पत्नी दक्षाबेन पटेल और बहू कनक को खो दिया है।
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पहली बार मंदिर के अंदर हवन करना पड़ गया भारी
लक्ष्मीकांत ने बताया कि 1970 में यहां पर गिनती के दो या तीन मकान थे। मंदिर की जगह सिर्फ ओटला था और पास में बावड़ी थी। बाद में यहां पर मंदिर बन गया। अब नया मंदिर बन रहा था। अगले साल महादेव मंदिर की मूर्तियों को इसी नए मंदिर में शिफ्ट करना था। इसी वजह से सभी ने कहा कि इस बार बाहर निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए हवन पूजन मंदिर के अंदर ही कर लिया जाए। इसी कारण पहली बार मंदिर के अंदर हवन पूजन किया जा रहा था और हादसा हो गया।
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काम रुकवाने के झगड़े में 20 साल पहले दर्ज हुआ था केस
मंदिर का काम रुकवाने के लिए 20 साल पहले झगड़ा हुआ था। इसमें भी मारपीट का केस दर्ज किया गया था। तब मंदिर के वर्तमान अध्यक्ष सेवाराम गलानी और स्थानीय रहवासी कांतिभाई पटेल के बीच यह विवाद हुआ था। उस वक्त रहवासी मंदिर के नाम पर हो रहे अतिक्रमण का विरोध कर रहे थे।
