फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: 700 tons of ash of UCC waste will be buried in Pithampur after the rain

Indore: यूका कचरे की 700 टन राख बारिश के बाद पीथमपुर में होगी दफन

Sun, 06 Jul 2025 08:02 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sun, 06 Jul 2025 08:02 AM IST
सार

कंपनी के परिसर में कचरे को दफनाने के लिए 30 हजार से ज्यादा वर्गफीट चौड़ाई में गड्ढा खोदा गया है। उसे काले रंग के विशेष प्लास्टिक से कवर किया गया है। उसके भीतर वैज्ञानिक तरीके से राख को रखा जाएगा। बाद में कचरे की उपरी सतह को भी पैक किया जाएगा।

विज्ञापन
Indore: 700 tons of ash of UCC waste will be buried in Pithampur after the rain
यहां रखी जाएगी कचरे की राख। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

40 साल पहले भोपाल में पांच हजार से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले वाली यूनियन कार्बाइट फैक्टरी के जहरीले कचरे का नामोनिशान मिट गया। 337 टन कचरे को पीथमपुर के रामकी भस्मक में जला दिया गया,लेकिन अब कचरे की बची 700 टन राख पीथमपुर वासियों के लिए चिंता का विषय है। यह राख भस्मक के परिसर में ही दफन होगी। वर्षाकाल बीतने के बाद उसे लैंडफील किया जाएगा। फिलहाल उसे लीकप्रूफ बैगों में सुरक्षित रखा गया है।

विज्ञापन

 

बची राख में कौन-कौन से तत्व है। इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग पीथमपुर की समिति कर रही है। उनका कहना है कि 12 साल पहले भी 20 टन भोपाल का कचरा इंदौर लाकर चुपचाप दफन कर दिया गया था। उसके बाद गांव के बोरिंग व बावड़ी दूषित हो गई। बोरिंगों का पानी ग्रामीण इस्तेमाल नहीं करते है।

विज्ञापन

 

राख का नहीं होगा जमीन से संपर्क

कंपनी के परिसर में कचरे को दफनाने के लिए 30 हजार से ज्यादा वर्गफीट चौड़ाई में गड्ढा खोदा गया है। उसे काले रंग के विशेष प्लास्टिक से कवर किया गया है। उसके भीतर वैज्ञानिक तरीके से राख को रखा जाएगा। बाद में कचरे की उपरी सतह को भी पैक किया जाएगा। पहले जहां कचरा दफन किया गया है। उसके समीप पीथमपुर का ट्रेंचिंग ग्राउंड तैयार किया गया है। इसके अलावा वहां कुछ किसानों की खेती की जमीन भी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

किसान अंतर सिंह का कहना है कि कचरा दफन करने के बाद खेत में फसल ठीक से नहीं उग पाती है। जमीन में बीज बोते है तो वह काले पड़ जाते है। बारिश के दिनों में जो पानी जमा होता है। उसका रंग भी काला हो जाता है। उनका कहना है कि 700 टन राख का निपटना भी ठीक तरीके से होना चाहिए,ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed