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Indore Water Crisis: ड्यूटी निभा रहे पुलिसकर्मी, घर पर पानी के लिए जूझ रहा परिवार, बोरिंग बंद; टैंकर ही सहारा

Thu, 07 May 2026 06:31 AM IST
Sabahat Husain न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Sabahat Husain Updated Thu, 07 May 2026 06:31 AM IST
सार

Indore Water Crisis: इंदौर की डीआरपी लाइन में 400 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के परिवार पानी की कमी से जूझ रहे हैं। बोरिंग बंद है और नलों में कम पानी आने से लोग टैंकरों पर निर्भर हैं, जिससे रोज पानी जुटाने में भारी परेशानी हो रही है।

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Indore Water Crisis: Policemen on Duty While Families Struggle for Water at Home Water Shortage
इंदौर जलसंकट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर में दिनभर शहर की ट्रैफिक और कानून व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों के परिवार खुद पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि उन्हें दिनभर टैंकरों का इंतजार करना पड़ता है। पानी जमा करने के लिए घरों में ड्रम रखे गए हैं, जिनमें भरे पानी को मोटर के जरिए ओवरहेड टंकियों तक पहुंचाना पड़ता है। शहर की डीआरपी लाइन में 400 से अधिक पुलिसकर्मियों के परिवार निवास करते हैं। यहां सामान्यतः नर्मदा लाइन और बोरिंग के माध्यम से सालभर पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन गर्मी के मौसम में स्थिति बिगड़ जाती है। नर्मदा लाइन के नलों में पानी का दबाव काफी कम हो जाता है, वहीं कई बोरिंग भी जवाब दे देते हैं।

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डीआरपी लाइन में अधिकतर लोग अपार्टमेंट में रहते हैं, जहां दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहने वालों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। बारिश और सर्दियों में पानी आसानी से टंकियों तक पहुंच जाता है, लेकिन गर्मियों में टैंकर ही एकमात्र सहारा बन जाते हैं। पहले ड्रमों में पानी भरना और फिर मोटर से उसे टंकी तक चढ़ाना—यह रोज की मशक्कत बन गई है, जिसमें परिवार के किसी सदस्य का करीब आधा घंटा रोज खर्च होता है। सिपाही नरेश सोनी बताते हैं कि ड्यूटी पर जाने से पहले ही पानी की चिंता सताने लगती है। नलों में मुश्किल से 10 मिनट पानी आता है, जिससे पर्याप्त भंडारण नहीं हो पाता।

वहीं निवासी श्रीकुवंर का कहना है कि पिछले दो दिनों से नलों में पानी नहीं आया है। बोरिंग की वायरिंग जल जाने से स्थिति और खराब हो गई है। टैंकर बुलाने के लिए बार-बार फोन करना पड़ता है, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। मजबूरी में पानी का बहुत सावधानी से उपयोग करना पड़ रहा है, यहां तक कि कपड़े धोने तक सीमित करने पड़ रहे हैं।

सोहरम पटेल बताते हैं कि उनके दोनों बेटे पुलिस सेवा में हैं और सुबह जल्दी ड्यूटी पर चले जाते हैं, जिससे घर पर पानी की समस्या और बढ़ जाती है। डीआरपी लाइन में मैदान, मंदिर और गार्डन जैसी सुविधाएं तो हैं, लेकिन पानी की समस्या बेहद गंभीर बनी हुई है। मई के महीने में हालात और खराब हो जाते हैं। नल दो-तीन दिन में एक बार ही आते हैं और टैंकरों के भरोसे ही गुजारा करना पड़ रहा है।

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