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इंदौर: कचरे से रोज बनेगी 500 टन सीएनजी, दौड़ेंगी 400 बसें; प्रधानमंत्री आठ को करेंगे प्लांट का उद्घाटन
Fri, 04 Feb 2022 07:02 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 04 Feb 2022 07:02 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8 फरवरी को इंदौर में कचरे से बनाए जाने वाले बायो सीएनजी प्लांट का विधिवत वर्चुअली उद्घाटन करेंगे। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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Indore: प्रधानमंत्री इंदौर में बायो CNG प्लांट का वर्चुअली उद्घाटन करेंगे
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
इंदौर के देवगुराड़िया कोर्ट में बायो सीएनजी प्लांट का काम पूर्ण हो चुका है। प्लांट का विधिवत उद्घाटन 8 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल करेंगे। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई है। प्लांट में उत्पादित गैस से रोजाना एआईसीटीएसएल की बसें संचालित होंगी। प्रदेश में पहली बार इस तरह का प्रयोग निगम करने जा रहा है।
एक अधिकारी ने बताया कि शहर में रोजाना डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में 200 टन गीला कचरा निकलता है। बड़ी मात्रा में गीले कचरे को निष्पादित करना चुनौती बन गया था। प्रारंभिक दौर में गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जा रही थी। यह खाद किसानों को 3 रुपये प्रति किलो बेची जाती हैं। गीले कचरे से निर्मित होने के कारण यह खाद खेत उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। जिन किसानों ने इस खाद का उपयोग किया, उनकी फसलें भी अधिक उत्पादित हुईं।
इसके बाद जो गीला कचरा बचता है, उसका उपयोग सीएनजी के लिए किया जाने लगा। गुजरात की कंपनी द्वारा गीले कचरे से गैस बनाने का अनुबंध किया गया था। अनुबंध के बाद करीब दो साल से काम किया जा रहा था। यहां से रोजाना 500 टन गैस उत्पादित होगी। वर्तमान में शहर में एआईसीटीएसएल की 400 से अधिक बसें दौड़ रही हैं, जो पेट्रोल पंप से सीएनजी भराती हैं। इसमें काफी राशि खर्च करना पड़ती है। अब देवगुराड़िया स्थित सीएनजी प्लांट से बसों में गैस भरी जा सकेगी। प्रायोगिक तौर पर कुछ बसें में गैस भरी जाएगी। प्लांट की दूरी अधिक होने से कोशिश की जाएगी कि गैस की नई लाइन बिछाई जाए, यह लाइन पेट्रोल पंप से जोड़ दी जाएगी।
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एक अधिकारी ने बताया कि शहर में रोजाना डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में 200 टन गीला कचरा निकलता है। बड़ी मात्रा में गीले कचरे को निष्पादित करना चुनौती बन गया था। प्रारंभिक दौर में गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जा रही थी। यह खाद किसानों को 3 रुपये प्रति किलो बेची जाती हैं। गीले कचरे से निर्मित होने के कारण यह खाद खेत उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। जिन किसानों ने इस खाद का उपयोग किया, उनकी फसलें भी अधिक उत्पादित हुईं।
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इसके बाद जो गीला कचरा बचता है, उसका उपयोग सीएनजी के लिए किया जाने लगा। गुजरात की कंपनी द्वारा गीले कचरे से गैस बनाने का अनुबंध किया गया था। अनुबंध के बाद करीब दो साल से काम किया जा रहा था। यहां से रोजाना 500 टन गैस उत्पादित होगी। वर्तमान में शहर में एआईसीटीएसएल की 400 से अधिक बसें दौड़ रही हैं, जो पेट्रोल पंप से सीएनजी भराती हैं। इसमें काफी राशि खर्च करना पड़ती है। अब देवगुराड़िया स्थित सीएनजी प्लांट से बसों में गैस भरी जा सकेगी। प्रायोगिक तौर पर कुछ बसें में गैस भरी जाएगी। प्लांट की दूरी अधिक होने से कोशिश की जाएगी कि गैस की नई लाइन बिछाई जाए, यह लाइन पेट्रोल पंप से जोड़ दी जाएगी।
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