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मध्य प्रदेश: इंदौर-देवास बायपास की बदहाली पर सख्त हाईकोर्ट, एनएचएआई परियोजना निदेशक तलब

Sat, 07 Nov 2026 09:33 AM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय Updated Sat, 07 Nov 2026 09:33 AM IST
सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने इंदौर-देवास बायपास की जर्जर स्थिति और रखरखाव में लापरवाही पर नाराजगी जताई है। अदालत ने NHAI के परियोजना निदेशक को 22 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। अधिकारी को सड़क के बेहतर रखरखाव की भविष्य की कार्ययोजना और अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी होगी।

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indore Dewas Bypass Road Condition MP High Court NHAI Project Director
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने इंदौर-देवास बायपास की जर्जर स्थिति और रखरखाव में घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक को आगामी 22 दिसंबर  को कोर्ट के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का सख्त आदेश जारी किया है। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने अधिकारी से सड़क के बेहतर रखरखाव की भविष्य की स्पष्ट कार्ययोजना भी पेश करने को कहा है।
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टोल वसूली बंद करने की मांग
एमएएटीआर (MAATR) फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका में बायपास की बदहाली का मुद्दा उठाया गया। याचिका में बताया गया कि सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो चुके हैं, जिससे मार्ग असमतल और फिसलन भरा हो गया है। इसके अतिरिक्त जलभराव, जाम नालियां, खराब दृश्यता, पुल-पुलियाओं में दरारें और सर्विस रोड व अंडरपास की दयनीय स्थिति से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने मांग की कि सड़क का उचित रखरखाव सुनिश्चित होने तक टोल वसूली तत्काल प्रभाव से बंद की जाए। याचिका में सड़क सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन न होने का विषय उठाते हुए ताजा रंगीन तस्वीरें भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत की गईं।
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याचिकाकर्ता पर सवाल से नाराजगी
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ में 28 अक्तूबर  को इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्राधिकरण की ओर से याचिकाकर्ता के अधिकार पर ही सवाल उठाए गए। इस रवैये पर उच्च न्यायालय ने भारी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक हित से जुड़े सड़क रखरखाव के महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने के बजाय प्रतिवादी पक्ष का जोर याचिकाकर्ता के अधिकार पर सवाल उठाने पर ही रहा।
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भविष्य की योजना देने का निर्देश
उच्च न्यायालय ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक को निर्देश दिए कि वे सभी शिकायतों का निराकरण करें और अगली सुनवाई तक की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अधिकारी को अदालत में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि भविष्य में बायपास की सड़कों का नियमित और प्रभावी रखरखाव किस प्रकार सुनिश्चित किया जाएगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि 22 दिसंबर  निर्धारित की है।
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