{"_id":"625155af07ce816e4b583e93","slug":"in-madhya-pradesh-a-government-school-teacher-made-the-streets-of-the-village-a-classroom-texts-written-on-the-walls","type":"story","status":"publish","title_hn":"मास्साब की मोहल्ला क्लास: एमपी में शिक्षक ने गांव की गलियों को बनाया कक्षा, दीवारों पर लिख दी ज्ञान की इबारत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मास्साब की मोहल्ला क्लास: एमपी में शिक्षक ने गांव की गलियों को बनाया कक्षा, दीवारों पर लिख दी ज्ञान की इबारत
Sat, 09 Apr 2022 03:15 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sat, 09 Apr 2022 03:15 PM IST
सार
जबलपुर जिले से 40 किमी दूर धरमपुरा गांव में सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए अनोखी पहल की। शिक्षक ने गांव की गलियों, दीवारों पर अक्षर ज्ञान और गणित के सूत्र लिखवा दिए ताकि बच्चे जब जहां से गुजरे कुछ ज्ञानवर्धक पढ़ें।
विज्ञापन
शिक्षक दिनेश मिश्रा।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने गांव के गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए एक अनूठा तरीका निकाला हैं। गांव का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए मास्टर साहब ने पूरे गांव को ही स्कूल बना दिया हैं। आप सोच रहे होंगे कि आखिर पूरे गांव को स्कूल बनाना कैसे संभव है, लेकिन इस मुश्किल काम को भी शासकीय शिक्षक दिनेश शर्मा ने मुमकिन किया है। जबलपुर से 40 किमी दूर बसे धरमपुरा गांव की हर दीवार शिक्षा के सुनहरे आखरों से भरी है। शिक्षक दिनेश मिश्रा की इस नेक पहल की ग्रामीणों के साथ ही उनसे पढ़ने वाले बच्चे भी खूब सराहना करते हैं।
दरअसल कोरोना काल के दौरान शिक्षक दिनेश मिश्रा ने बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो इसे सोचकर मोहल्ला क्लासेस की शुरुआत की थी। गांव में ज्यादातर आबादी मजदूर वर्ग की है। मजदूरों के बच्चे अपने माता-पिता के साथ काम पर चले जाते थे, जिसके चलते वे पढ़ने के लिए एक साथ एक जगह पर नहीं आ पाते थे। इस समस्या को देखते हुए शिक्षक दिनेश मिश्रा ने गांव की तंग गलियों को क्लासरूम और दीवारों को ब्लैकबोर्ड बनाने के बारे में सोचा। उन्होंने गांव की हर दीवार को शिक्षाप्रद बनाने के लिए अक्षर ज्ञान व गणित के जोड़-घटाने के समीकरणों को लिख दिया। दीवारों पर लिखी उनकी ज्ञान की इबारत अब पूरे धरमपुरा गांव में ज्ञान का उजियारा फैला रही है।
शिक्षक की इस अनूठी पहल ने न सिर्फ बच्चों को बल्कि उनके माता पिता को भी शिक्षा की अहमियत को समझाया हैं। उनकी नेक सोच और जिद ने साधारण दीवारों को असाधारण ज्ञान से भर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और वोट अपीलों से भरी दीवारें तो पहले भी लोगों ने देखी थी लेकिन शासकीय शिक्षक दिनेश मिश्रा ने गांव की तंग गलियों के माध्यम से बच्चे, बड़े और बूढ़ों सभी को ज्ञानवर्धक जानकारी दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल कोरोना काल के दौरान शिक्षक दिनेश मिश्रा ने बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो इसे सोचकर मोहल्ला क्लासेस की शुरुआत की थी। गांव में ज्यादातर आबादी मजदूर वर्ग की है। मजदूरों के बच्चे अपने माता-पिता के साथ काम पर चले जाते थे, जिसके चलते वे पढ़ने के लिए एक साथ एक जगह पर नहीं आ पाते थे। इस समस्या को देखते हुए शिक्षक दिनेश मिश्रा ने गांव की तंग गलियों को क्लासरूम और दीवारों को ब्लैकबोर्ड बनाने के बारे में सोचा। उन्होंने गांव की हर दीवार को शिक्षाप्रद बनाने के लिए अक्षर ज्ञान व गणित के जोड़-घटाने के समीकरणों को लिख दिया। दीवारों पर लिखी उनकी ज्ञान की इबारत अब पूरे धरमपुरा गांव में ज्ञान का उजियारा फैला रही है।
विज्ञापन
शिक्षक की इस अनूठी पहल ने न सिर्फ बच्चों को बल्कि उनके माता पिता को भी शिक्षा की अहमियत को समझाया हैं। उनकी नेक सोच और जिद ने साधारण दीवारों को असाधारण ज्ञान से भर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और वोट अपीलों से भरी दीवारें तो पहले भी लोगों ने देखी थी लेकिन शासकीय शिक्षक दिनेश मिश्रा ने गांव की तंग गलियों के माध्यम से बच्चे, बड़े और बूढ़ों सभी को ज्ञानवर्धक जानकारी दे रहे हैं।
विज्ञापन
