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हमीदिया अग्निकांड: 40 बच्चों की मौत का मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए याचिका दायर
Mon, 07 Feb 2022 08:21 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 07 Feb 2022 08:21 PM IST
सार
भोपाल स्थित कमला नेहरू गैस राहत हॉस्पिटल हमीदिया के नीयोनेटल वार्ड में 8 नवंबर को हुए अग्नि हादसे के दौरान भर्ती सभी 40 नवजात बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
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40 नवजात बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
भोपाल स्थित कमला नेहरू गैस राहत हॉस्पिटल हमीदिया के नीयोनेटल वार्ड में 8 नवंबर को हुए अग्नि हादसे के दौरान भर्ती सभी 40 नवजात बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि पीड़ित परिवारों को किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया गया है। इसके अलावा दोषियों के खिलाफ एफआईआर तथा कार्यवाही नहीं हुई है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
भोपाल से विधायक आरिफ मसूद की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि भोपाल स्थित कमला नेहरू गैस राहत हॉस्पिटल हमीदिया के तीसरी मंजिल में स्थित नीयोनेटल वार्ड में 8 नवंबर को आग लग गई थी। आग लगने के दौरान अस्पताल को पूरा स्टाफ उक्त मंजिल से भाग गया था। वार्ड में भर्ती 40 बच्चों के परिजनों ने किसी तरफ दरवाजा व शीशे तोड़कर बच्चों को बचाने का प्रयास किया था। अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार अग्नि हादसे में वेंटिलेटर में रखे गए 7 नवजात बच्चों सहित कुल दस बच्चों की मौत हुई थी।
इस संबंध में जब उन्होंने विधानसभा में प्रश्न उठाया था तो स्वास्थ्य मंत्री ने बताया था कि अग्नि हादसे में कुल 4 बच्चों की मौत हुई थी और उनके परिजनों को 4 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिए गए थे। अग्नि हादसे के दोषी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के संबंध में विधायक तरुण भनोत ने विधानसभा में प्रश्न किया था। जिसके जवाब में झूठी जानकारी दी गई कि किसी प्रकाश की शिकायत नहीं होने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जबकि याचिकाकर्ता ने कोहेफिजा थाने में घटना के संबंध में लिखित शिकायत दी थी।
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याचिका में कहा गया था कि घटना के वार्ड में 40 नवजात बच्चे भर्ती थे। जिसमें से 5 बच्चों की मौत जलने के कारण हुई थी और शेष बच्चों की मौत उपचार के दौरान हो गई है। याचिका में कहा गया था कि अस्पताल में किसी प्रकार के फायर सेफ्टी उपकरण नहीं थे। याचिका में मांग की गई कि जिन अधिकारियों के लापरवाही के कारण हादसा हुआ उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए कार्रवाई की जाए। इसके अलावा सभी पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। याचिका में स्वास्थ्य एव परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव व संचालक, अस्पताल के डीन, सुररिटेंडेंट संचालक, पीडब्ल्यू तथा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को अनावेदक बनाया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता रवि शंकर यादव ने पैरवी की।
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भोपाल से विधायक आरिफ मसूद की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि भोपाल स्थित कमला नेहरू गैस राहत हॉस्पिटल हमीदिया के तीसरी मंजिल में स्थित नीयोनेटल वार्ड में 8 नवंबर को आग लग गई थी। आग लगने के दौरान अस्पताल को पूरा स्टाफ उक्त मंजिल से भाग गया था। वार्ड में भर्ती 40 बच्चों के परिजनों ने किसी तरफ दरवाजा व शीशे तोड़कर बच्चों को बचाने का प्रयास किया था। अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार अग्नि हादसे में वेंटिलेटर में रखे गए 7 नवजात बच्चों सहित कुल दस बच्चों की मौत हुई थी।
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इस संबंध में जब उन्होंने विधानसभा में प्रश्न उठाया था तो स्वास्थ्य मंत्री ने बताया था कि अग्नि हादसे में कुल 4 बच्चों की मौत हुई थी और उनके परिजनों को 4 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिए गए थे। अग्नि हादसे के दोषी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के संबंध में विधायक तरुण भनोत ने विधानसभा में प्रश्न किया था। जिसके जवाब में झूठी जानकारी दी गई कि किसी प्रकाश की शिकायत नहीं होने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जबकि याचिकाकर्ता ने कोहेफिजा थाने में घटना के संबंध में लिखित शिकायत दी थी।
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याचिका में कहा गया था कि घटना के वार्ड में 40 नवजात बच्चे भर्ती थे। जिसमें से 5 बच्चों की मौत जलने के कारण हुई थी और शेष बच्चों की मौत उपचार के दौरान हो गई है। याचिका में कहा गया था कि अस्पताल में किसी प्रकार के फायर सेफ्टी उपकरण नहीं थे। याचिका में मांग की गई कि जिन अधिकारियों के लापरवाही के कारण हादसा हुआ उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए कार्रवाई की जाए। इसके अलावा सभी पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। याचिका में स्वास्थ्य एव परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव व संचालक, अस्पताल के डीन, सुररिटेंडेंट संचालक, पीडब्ल्यू तथा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को अनावेदक बनाया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता रवि शंकर यादव ने पैरवी की।
