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ग्वालियर: आईएएस के नाम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर रिटायर्ड इंजीनियर से ठगी, फर्नीचर बेचने का दिया झांसा

Thu, 24 Sep 2026 07:15 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: ग्वालियर ब्यूरो Updated Thu, 24 Sep 2026 07:15 PM IST
सार

ग्वालियर में साइबर ठगों ने आईएएस पी. नरहरि के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर रिटायर्ड इंजीनियर मैथिली शरण गुप्ता से करीब 1.60 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को आईएएस का परिचित और सीआरपीएफ कमांडेंट बताकर सस्ते फर्नीचर का झांसा दिया। मुरार पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है। 

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Retired engineer duped of ₹1.60 lakh by someone posing as an IAS officer on a fake Facebook profile
Cyber Crime - फोटो : FREEPIK

विस्तार

ग्वालियर में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने आईएएस अधिकारी पी. नरहरि के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाई और सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर को अपने जाल में फंसा लिया। आरोपियों ने खुद को आईएएस अधिकारी का परिचित और दूसरे आरोपी को सीआरपीएफ कमांडेंट बताकर फर्नीचर बेचने का झांसा दिया। इस तरह रिटायर्ड इंजीनियर से करीब 1 लाख 60 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। मामले में मुरार पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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जानकारी के मुताबिक, मुरार क्षेत्र में रहने वाले सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर मैथिली शरण गुप्ता को आईएएस पी. नरहरि के नाम से बनी एक फेसबुक आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली थी। गुप्ता ने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद कथित आईएएस ने उनसे मोबाइल नंबर लिया और सुमित कुमार नाम के व्यक्ति का नंबर भेजा।आरोपी ने सुमित कुमार को अपना दोस्त और सीआरपीएफ कमांडेंट बताया। इसके साथ ही कहा कि तबादला होने के कारण सुमित ग्वालियर में अपना फर्नीचर और अन्य सामान बेचना चाहते हैं। बातचीत आगे बढ़ी तो सुमित ने गुप्ता के वाट्सऐप पर फर्नीचर की तस्वीरें भेजीं।
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गुप्ता को फर्नीचर पसंद आ गया। आरोपियों ने करीब पांच लाख रुपये के फर्नीचर का सौदा महज 95 हजार रुपये में करने का झांसा दिया। कम कीमत का लालच देकर गुप्ता से आरोपी के बताए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करा ली गई। पैसे मिलने के बाद भी फर्नीचर नहीं पहुंचा। इसके बाद आरोपी ने सामान निकालने और भेजने के नाम पर गुप्ता से 61 हजार 500 रुपये और ले लिए। इस तरह उनसे कुल करीब 1 लाख 60 हजार रुपये ले लिए गए। इसके बाद भी जब फर्नीचर नहीं आया तो आरोपी ने तीसरी बार 88 हजार रुपये की मांग कर दी। यहीं गुप्ता को पूरे मामले पर शक हुआ। उन्होंने सीधे आईएएस पी. नरहरि से संपर्क कर मामले की जानकारी दी। नरहरि ने बातचीत से जुड़े फोटो और वीडियो मांगे और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। इसके बाद ठगी का पूरा मामला सामने आया। मामला खुलने की भनक लगते ही आरोपी ने वॉट्सऐप से फोटो और मैसेज डिलीट कर दिए और गुप्ता से बातचीत बंद कर दी।

पीड़ित की शिकायत पर मुरार पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस अब ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की सीडीआर समेत तकनीकी जानकारी जुटा रही है। पुलिस आरोपियों की पहचान और लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग अक्सर किसी अधिकारी या प्रतिष्ठित व्यक्ति के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर मिलने वाली संदिग्ध फ्रेंड रिक्वेस्ट और ऑनलाइन खरीद-फरोख्त के मामलों में बिना सत्यापन पैसे ट्रांसफर करने से बचना जरूरी है।

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