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Ganga Jamna School: हिजाब मामले में कोर्ट में पेश हुए कलेक्टर-एसपी, आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
Wed, 14 Jun 2023 07:43 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 14 Jun 2023 07:43 PM IST
सार
धर्मांतरण और हिजाब केस से चर्चित दमोह के गंगा जमुना स्कूल विवाद मामले में दमोह कलेक्टर औऱ एसपी न्यायालय में पेश हुए। सुनवाई के बाद आरोपियों की ओर से दायर जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी।
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गंगा जमना स्कूल हिजाब केस में कलेक्टर-एसपी कोर्ट में पेश हुए।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दमोह के गंगा जमुना स्कूल विवाद मामले में बुधवार को दमोह कलेक्टर मयंक अग्रवाल, एसपी राकेश कुमार सिंह और कोतवाली टीआई विजय सिंह राजपूत न्यायालय में पेश हुए। इधर मामले में आरोपी अनस अतहर, रुस्तम अली तथा प्राचार्य असफा शेख की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी।
मामले मे जानकारी देते हुए लोक अभियोजक मुकेश जैन ने बताया कि गंगा जमना स्कूल मामले में आरोपी अनस अतहर, रुस्तम अली तथा प्राचार्य असफा शेख द्वारा ज़मानत याचिका लगाई गई थी। इसमें पूर्व में दमोह कलेक्टर तथा एसपी के ट्वीट को आधार बनाकर कहा गया था कि कलेक्टर-एसपी ने क्लीन चिट दे दी थी। इसी मामले में न्यायलय ने दमोह कलेक्टर तथा एसपी को भी तलब किया गया था। सभी के तर्कों को सुनकर न्यायालय ने आरोपियों कि ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी।
बताया गया कि कोर्ट ने आरोपी पक्ष के वकीलों की दलील पर कलेक्टर और एसपी से पूछा कि क्या 31 मई को उन्होंने ट्विटर पर स्कूल में किसी भी तरह की अनियमितताएं ना पाए जाने की पोस्ट की थी। जिस पर कलेक्टर-एसपी ने हां कहा। गंगा जमना स्कूल प्रबंधन से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष की पैरवी कर रहे अधिवक्ता गजेंद्र चौबे ने बताया कि शुरुआत में एक शिकायत की गई थी, जिसमें छात्राओं को हिजाब पहनाने की बात सामने आई थी। इस मामले में कलेक्टर ने जांच कराई और उसके बाद एक ट्वीट किया जिसमें स्कूल में किसी भी तरह की अनियमितताएं ना होना पाया गया था। मैंने न्यायालय के सामने बात रखी कि 30 मई को जो रिपोर्ट पेश की गई थी उसमें किसी भी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई थी। उसके बाद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जिला प्रशासन को गंगा जमना स्कूल प्रबंधन के ऊपर एफआईआर करने के लिए कहा और उसके बाद कारवाई शुरू हो गई।
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न्यायालय में कलेक्टर, एसपी ने कहा है कि हां बात बिल्कुल सही है 31 मई तक स्कूल में किसी भी तरह का अपराध होना घटित नहीं पाया था। अधिवक्ता चौबे ने न्यायालय में दलील दी कि उसके बाद भी जांच शुरू की गई, जिसमें किसी की कोई शिकायत नहीं थी। पहली बार जो एफआईआर हुई है उसमें किसी का भी नाम नहीं है फिर भी शिक्षकों को पकड़कर उन्हें परेशान किया गया है।
बताई हिजाब की परिभाषा
अधिवक्ता गजेंद्र चौबे ने न्यायालय को बताया कि आईपीसी में हिजाब की कोई परिभाषा नहीं है। हम अपने चेहरे को ढंकने के लिए जो कपड़ा बांधते हैं उसे हिजाब कहते हैं। उन्होंने कहा कि जब सीता जी के सामने रावण पहुंचा था तो उन्होंने एक तिनके का सहारा लेकर रावण से बात की थी, मतलब वो तिनका भी हिजाब का काम कर रहा था। हमारे यहां पर्दा प्रथा है उसे हम हिजाब ही कहेंगे। जिससे हम अपने चेहरे को, अपने नाक, नक्श को छुपाते हैं उसे ही हिजाब कहते हैं।
दूसरे अधिवक्ता बोले- देश विरोधी गतिविधियां निकली तो मैं वापस ले लूंगा वकालतनामा
आरोपी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे दूसरे अधिवक्ता अनुनय श्रीवास्तव ने न्यायालय से कहा है कि वकालत हमारा व्यवसाय है। किसी पक्ष को सामने रखने का, लेकिन हम जब तक किसी के पक्ष को सामने रख रहे हैं जब तक वह अपराध किसी समाज के, किसी देश के खिलाफ ना हो। आज हमने न्यायालय में यह भी कहा है कि आज हम इस मामले की पैरवी कर रहे हैं, लेकिन जिस दिन इस मामले के तार ऐसी गतिविधियों से जुड़ने लगेंगे जो देश के खिलाफ होंगे, तो हम सबसे पहले ऐसे अधिवक्ता होंगे जो अपना वकालतनामा इस मामले से वापस ले लेंगे। वर्तमान अपराध में स्कूल, स्कूल प्रबंधन और बच्चों के भविष्य का प्रश्न है इसलिए मैं इस मामले में पैरवी कर रहा हूं।
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मामले मे जानकारी देते हुए लोक अभियोजक मुकेश जैन ने बताया कि गंगा जमना स्कूल मामले में आरोपी अनस अतहर, रुस्तम अली तथा प्राचार्य असफा शेख द्वारा ज़मानत याचिका लगाई गई थी। इसमें पूर्व में दमोह कलेक्टर तथा एसपी के ट्वीट को आधार बनाकर कहा गया था कि कलेक्टर-एसपी ने क्लीन चिट दे दी थी। इसी मामले में न्यायलय ने दमोह कलेक्टर तथा एसपी को भी तलब किया गया था। सभी के तर्कों को सुनकर न्यायालय ने आरोपियों कि ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी।
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बताया गया कि कोर्ट ने आरोपी पक्ष के वकीलों की दलील पर कलेक्टर और एसपी से पूछा कि क्या 31 मई को उन्होंने ट्विटर पर स्कूल में किसी भी तरह की अनियमितताएं ना पाए जाने की पोस्ट की थी। जिस पर कलेक्टर-एसपी ने हां कहा। गंगा जमना स्कूल प्रबंधन से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष की पैरवी कर रहे अधिवक्ता गजेंद्र चौबे ने बताया कि शुरुआत में एक शिकायत की गई थी, जिसमें छात्राओं को हिजाब पहनाने की बात सामने आई थी। इस मामले में कलेक्टर ने जांच कराई और उसके बाद एक ट्वीट किया जिसमें स्कूल में किसी भी तरह की अनियमितताएं ना होना पाया गया था। मैंने न्यायालय के सामने बात रखी कि 30 मई को जो रिपोर्ट पेश की गई थी उसमें किसी भी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई थी। उसके बाद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जिला प्रशासन को गंगा जमना स्कूल प्रबंधन के ऊपर एफआईआर करने के लिए कहा और उसके बाद कारवाई शुरू हो गई।
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न्यायालय में कलेक्टर, एसपी ने कहा है कि हां बात बिल्कुल सही है 31 मई तक स्कूल में किसी भी तरह का अपराध होना घटित नहीं पाया था। अधिवक्ता चौबे ने न्यायालय में दलील दी कि उसके बाद भी जांच शुरू की गई, जिसमें किसी की कोई शिकायत नहीं थी। पहली बार जो एफआईआर हुई है उसमें किसी का भी नाम नहीं है फिर भी शिक्षकों को पकड़कर उन्हें परेशान किया गया है।
बताई हिजाब की परिभाषा
अधिवक्ता गजेंद्र चौबे ने न्यायालय को बताया कि आईपीसी में हिजाब की कोई परिभाषा नहीं है। हम अपने चेहरे को ढंकने के लिए जो कपड़ा बांधते हैं उसे हिजाब कहते हैं। उन्होंने कहा कि जब सीता जी के सामने रावण पहुंचा था तो उन्होंने एक तिनके का सहारा लेकर रावण से बात की थी, मतलब वो तिनका भी हिजाब का काम कर रहा था। हमारे यहां पर्दा प्रथा है उसे हम हिजाब ही कहेंगे। जिससे हम अपने चेहरे को, अपने नाक, नक्श को छुपाते हैं उसे ही हिजाब कहते हैं।
दूसरे अधिवक्ता बोले- देश विरोधी गतिविधियां निकली तो मैं वापस ले लूंगा वकालतनामा
आरोपी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे दूसरे अधिवक्ता अनुनय श्रीवास्तव ने न्यायालय से कहा है कि वकालत हमारा व्यवसाय है। किसी पक्ष को सामने रखने का, लेकिन हम जब तक किसी के पक्ष को सामने रख रहे हैं जब तक वह अपराध किसी समाज के, किसी देश के खिलाफ ना हो। आज हमने न्यायालय में यह भी कहा है कि आज हम इस मामले की पैरवी कर रहे हैं, लेकिन जिस दिन इस मामले के तार ऐसी गतिविधियों से जुड़ने लगेंगे जो देश के खिलाफ होंगे, तो हम सबसे पहले ऐसे अधिवक्ता होंगे जो अपना वकालतनामा इस मामले से वापस ले लेंगे। वर्तमान अपराध में स्कूल, स्कूल प्रबंधन और बच्चों के भविष्य का प्रश्न है इसलिए मैं इस मामले में पैरवी कर रहा हूं।
