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MP में फर्जीवाड़ा: अपात्रों के भी बने आयुष्मान कार्ड, सरकार को लग रही लाखों की चपत, ग्वालियर और भिंड में फर्जी कार्ड बनाने वालों पर एफआईआर
Tue, 28 Dec 2021 02:50 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Tue, 28 Dec 2021 02:50 PM IST
सार
ग्वालियर और भिंड में आयुष्मान कियोस्क संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दरअसल ये मामला फर्जी आयुष्मान कार्ड के जरिए लाखों के घोटाले से जुड़ा हुआ है। प्रदेश के 6 जिलों से फर्जी आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने का मामला सामने आया है।
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Bhopal: अपात्रों के आयुष्मान कार्ड बनने से सरकार को लाखों की चपत लग रही है।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश के ग्वालियर और भिंड में आयुष्मान कियोस्क संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दरअसल ये मामला फर्जी आयुष्मान कार्ड के जरिए लाखों के घोटाले से जुड़ा हुआ है। प्रदेश के 6 जिलों से फर्जी आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि 25 से अधिक कार्ड से 20 लाख रुपये का इलाज कराया गया, जिसकी चपत सरकार को लग चुकी है। सरकार जांच की बात कह रही है और दोषी लोगों पर सख्ती की तैयारी कर रही है।
बता दें कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को विभिन्न अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने की सुविधा दी जाती है। कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे आयुष्मान कार्ड धारकों ने अस्पतालों में मुफ्त इलाज करवा लिया है, जिनके कार्ड की फर्जी थे। प्रदेश के 6 जिलों से ऐसे मामले सामने आए हैं। ग्वालियर के रामनिवास मांझी ने 6 फर्जी कार्ड बनाए। इनके माध्यम से 1 लाख 300 रुपये का इलाज करवाया। भिंड के अखंड प्रताप सिंह भदौरिया और वीरभान बंसल ने 6 फर्जी कार्ड बनाकर 10 लाख 67 हजार 550 रुपये का इलाज करवाया। इंदौर के विशाल कानूनगो ने 4 फर्जी कार्ड बनाए। इनके माध्यम से 1 लाख 4 हजार 975 रुपये का इलाज हुआ। भोपाल के मोहम्मद जैनुद्दीन ने 4 फर्जी कार्ड बनाए। इन कार्ड के जरिए 4 लाख 95 हजार 610 रुपये का इलाज करवाया गया। सीहोर के अरुण ठाकुर ने 3 फर्जी कार्ड बनाए। इनके इलाज के ऐवज में 76,560 रुपये सरकार ने भुगतान किए। विदिशा के रईस कुरैशी ने 3 फर्जी कार्ड बनाए। इनके जरिए 95 हजार 345 रुपये का इलाज हुआ।
जिसका सम्मान सीएम ने किया, उसी पर एफआईआर
मामले में हैरान करने वाली एक बात ये भी सामने आई थी कि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर के जिस रामनिवास झा का सबसे अधिक आयुष्मान कार्ड बनाने पर सम्मान किया था, उसके खिलाफ पड़ाव थाना पुलिस ने आयुष्मान फर्जीवाड़ा मामले में एफआइआर दर्ज की है। रामनिवास मांझी द्वारा बनाए गए कार्डों में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। भोपाल से हुई जांच में 6 कार्ड फर्जी निकले और उन कार्ड से शासन की आयुष्मान योजना का लोगों ने लाभ ले लिया। जिससे सरकार को दस लाख रुपये का चूना लगा।
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संदेह होने पर शुरू की गई जांच
आयुष्मान भारत निरामयम, मप्र की ओर प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ संदेहास्पद मामलों की जानकारी मिलने पर पिछले महीने से आयुष्मान कार्डों की जांच शुरू की गई। इसके तहत अभी तक 6 जिलों में 26 फर्जी आयुष्मान कार्ड पकड़े गए हैं। प्रदेश के सभी जिलों को जांच के दायरे में लिया गया है। बता दें कि प्रदेश में अब तक 2 करोड़ 58 लाख, 28 हजार 693 आयुष्मान कार्ड बने हैं। इन कार्डों के जरिए 11 लाख 84 हजार 478 लोग अस्पतालों से मुफ्त इलाज की सुविधा ले चुके हैं। प्रदेश में 467 सरकारी और 396 प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से विभिन्न बीमारियों के मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
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बता दें कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को विभिन्न अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने की सुविधा दी जाती है। कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे आयुष्मान कार्ड धारकों ने अस्पतालों में मुफ्त इलाज करवा लिया है, जिनके कार्ड की फर्जी थे। प्रदेश के 6 जिलों से ऐसे मामले सामने आए हैं। ग्वालियर के रामनिवास मांझी ने 6 फर्जी कार्ड बनाए। इनके माध्यम से 1 लाख 300 रुपये का इलाज करवाया। भिंड के अखंड प्रताप सिंह भदौरिया और वीरभान बंसल ने 6 फर्जी कार्ड बनाकर 10 लाख 67 हजार 550 रुपये का इलाज करवाया। इंदौर के विशाल कानूनगो ने 4 फर्जी कार्ड बनाए। इनके माध्यम से 1 लाख 4 हजार 975 रुपये का इलाज हुआ। भोपाल के मोहम्मद जैनुद्दीन ने 4 फर्जी कार्ड बनाए। इन कार्ड के जरिए 4 लाख 95 हजार 610 रुपये का इलाज करवाया गया। सीहोर के अरुण ठाकुर ने 3 फर्जी कार्ड बनाए। इनके इलाज के ऐवज में 76,560 रुपये सरकार ने भुगतान किए। विदिशा के रईस कुरैशी ने 3 फर्जी कार्ड बनाए। इनके जरिए 95 हजार 345 रुपये का इलाज हुआ।
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जिसका सम्मान सीएम ने किया, उसी पर एफआईआर
मामले में हैरान करने वाली एक बात ये भी सामने आई थी कि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर के जिस रामनिवास झा का सबसे अधिक आयुष्मान कार्ड बनाने पर सम्मान किया था, उसके खिलाफ पड़ाव थाना पुलिस ने आयुष्मान फर्जीवाड़ा मामले में एफआइआर दर्ज की है। रामनिवास मांझी द्वारा बनाए गए कार्डों में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। भोपाल से हुई जांच में 6 कार्ड फर्जी निकले और उन कार्ड से शासन की आयुष्मान योजना का लोगों ने लाभ ले लिया। जिससे सरकार को दस लाख रुपये का चूना लगा।
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संदेह होने पर शुरू की गई जांच
आयुष्मान भारत निरामयम, मप्र की ओर प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ संदेहास्पद मामलों की जानकारी मिलने पर पिछले महीने से आयुष्मान कार्डों की जांच शुरू की गई। इसके तहत अभी तक 6 जिलों में 26 फर्जी आयुष्मान कार्ड पकड़े गए हैं। प्रदेश के सभी जिलों को जांच के दायरे में लिया गया है। बता दें कि प्रदेश में अब तक 2 करोड़ 58 लाख, 28 हजार 693 आयुष्मान कार्ड बने हैं। इन कार्डों के जरिए 11 लाख 84 हजार 478 लोग अस्पतालों से मुफ्त इलाज की सुविधा ले चुके हैं। प्रदेश में 467 सरकारी और 396 प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से विभिन्न बीमारियों के मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
