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इस गांव में रहने वाले अधिकतर बुजुर्गों की उम्र है 100 से ज्यादा, दूध-रोटी और हंसी है कारण

Mon, 01 Oct 2018 12:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Updated Mon, 01 Oct 2018 12:52 PM IST
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Doodh roti and laughter is a reason to longlive of centenarians in Madhya Pradesh  village

मध्यप्रदेश के सिहोर जिले में बसा है एक ऐसा गांव जहां रहने वाले बहुत से बुजुर्ग 100 साल की उम्र पार कर चुके हैं। गांव के रहने वाले शंकर सिंह का कहना है कि वह 102 साल के हैं। वह कहते हैं कि जब देश आजाद हुआ था तब वह 31 साल के थे और पहली बार हुए चुनावों में उन्होंने भी वोट डाला था।

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उनका कहना है कि अगले चुनाव में शायद वह आखिरी बार वोट डालेंगे। इस गांव का नाम ढिंगाखेड़ी है। यहां एक नहीं बल्कि कई लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 100 साल के ऊपर है। इन लोगों ने न केवल देश की पहली सरकार को बनते देखा है बल्कि देश के अच्छे बुरे सभी हालातों को भी करीब से जाना है।
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यहां के लोग चिंता कम करते हैं, शायद यही वजह है इनकी लंबी उम्र की। इस गांव में सात लोगों की उम्र 100 साल से अधिक है और 5 लोग ऐसे हैं जो दावा करते हैं कि उनकी उम्र 100 से ज्यादा है। इस बात को साबित करने के लिए उनके पास कोई दस्तावेज नहीं हैं। लेकिन उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है।
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खाने में क्या खाते हैं?

500 लोगों के इस गांव में 100 साल से ऊपर के लोगों के बारे में जानने के बाद ये सवाल उठना लाजमी है कि भला ये लोग खाने में क्या खाते होंगे। पूछे जाने पर 102 साल की कंचन बाई के पोते कहते हैं कि ये लोग सादी दाल रोटी या फिर दूध रोटी ही खाते हैं।

107 साल के हामिर सिंह कहते हैं कि उनकी लंबी उम्र का राज है चाय पीना और दोस्तों के साथ ढेर सारी बातें करना। वो कहते हैं कि शाम को घर लौटने के बाद वह अपनी 102 साल की पत्नी पारी बाई से भी बातें करतें हैं। दोनों एक दूसरे को बताते हैं कि उनका दिन कैसा रहा। पारी कहती हैं, जब भी वह बोर हो जाती हैं तो अपनी सहेलियों के पास चले जाती हैं।

सबके पास नहीं है मोबाइल फोन

Doodh roti and laughter is a reason to longlive of centenarians in Madhya Pradesh  village

शादी को कितने साल हुए इस बात के जवाब में पारी कहती हैं कि उन्हें याद नहीं। फिर हामिर कहते हैं हम इतनी चिंता नहीं करते कि शादी को कितने साल हुए। वह कहते हैं कि अगर उनमें से कोई एक किसी दूसरे को कुछ गलत बोल देता है तो दूसरा वहां से चले जाता है। वह आपस में लड़ाई नहीं करते और कुछ समय बाद सबकुछ भूल जाते हैं।

हरे भरे जंगल और पहाड़ों से घिरे इस गांव में संचार सुविधाओं की कमी है। 102 साल के हामिर तो बात करने से पहले गुटखा खाने की बात करते हैं और कहते हैं कि वह हर बार वोट डालने जाते हैं। गांव में सब एक दूसरे को जानते हैं। बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जिनके पास मोबाइल फोन हैं।

ज्यादातर का कहना है कि उन्हें फोन की जरूरत ही नहीं पड़ती। मध्यप्रदेश के इस गांव में सबसे अधिक संख्या में 100 साल की उम्र से ज्यादा के बुजुर्ग रहते हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 4,117 मतदाता 100 की उम्र पार कर चुके हैं।

75 वर्षीय राम सिहं का कहना है कि उनके पिता 130 साल से ज्यादा जी चुके हैं। उनकी मौत कुछ साल पहले ही हुई है। तराना में 100 की उम्र पार कर चुके 117 लोग हैं। आष्टा में 112 और इलचवार में 101 वोटर हैं। 102 साल की संपत बाई कहती हैं कि वह वोट डालने के लिए 17-18 किमी दूर जाती थीं और अभी भी उनकी हिम्मत बरकरार है।

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