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मध्यप्रदेश: दिग्विजय ने सिंधिया पर साधा निशाना, कमलनाथ ने शिवराज से की मुलाकात

Tue, 24 Mar 2020 07:20 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 24 Mar 2020 07:20 PM IST
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Digvijaya singh attck scindia for auctioning mandate given by mp people kamal nath met with shivraj
दिग्विजय सिंह-ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

मध्यप्रदेश में कई दिनों तक चले सियासी ड्रामे के बाद सोमवार रात को शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और मंगलवार को विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया। वहीं कमलनाथ की 15 महीने की सरकार गिराने में ज्योतिरादित्य सिंधिया की अहम भूमिका रही। अब सिंधिया के पुराने साथी रहे दिग्विजय सिंह ने उनपर जनादेश को नीलाम करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की और प्रदेश के विकास में सहयोग करने का आश्वासन दिया।

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को कहा कि सिंधिया मध्यप्रदेश के जनादेश को नीलाम कर गए। उन्होंने यह आरोप खुले पत्र में लगाया है। पत्र में उन्होंने लिखा, 'पिछले दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस पार्टी छोड़ी, और कांग्रेस की सरकार गिर गई। यह बेहद दुखद घटनाक्रम है जिसने न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं बल्कि उन सभी नागरिकों की आशाओं और संघर्ष पर पानी फेर दिया, जो कांग्रेस की विचारधारा में यकीन रखते हैं।' 
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दिग्विजय ने कहा कि मुझे बेहद दुख है कि सिंधिया उस वक्त भाजपा में गए, जब भाजपा खुलकर आरएसएस के असली एजेंडा को लागू करने के लिए देश को पूरी तरह बांट रही है। कुछ लोग यह कह रहे हैं कि सिंधिया को कांग्रेस में उचित पद और सम्मान मिलने की संभावना समाप्त हो गई थी, इसलिए वह भाजपा में चले गए। लेकिन ये गलत है। यदि वह प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनना चाहते थे, तो ये पद उन्हें 2013 में ही ऑफर हुआ था और तब उन्होंने केंद्र में मंत्री बने रहना पसंद किया था।
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दिग्विजय ने आगे कहा कि यही नहीं, 2018 में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें मध्यप्रदेश का उपमुख्यमंत्री पद संभालने का न्यौता भी दिया था। लेकिन उन्होंने स्वयं इसे अस्वीकार कर अपने समर्थक तुलसी सिलावट को उपमुख्यमंत्री बनाने की पेशकश कर दी थी। कमलनाथ तुलसी सिलावट को उपमुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार नहीं हुए और हाल के घटनाक्रम ने ये साबित भी कर दिया है कि वे सही थे। तुलसी सिलावट न सिर्फ भाजपा में गए, बल्कि ऐसे वक्त में गए, जब राज्य में कोरोना वायरस की महामारी से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के नाते उन्हीं की थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति केवल सत्ता की राजनीति नहीं है। आज कांग्रेस की विचारधारा के सामने संघ की विचारधारा है। ये दोनों विचारधाराएं भारत के अलग-अलग स्वरूप की कल्पना करती है। आज कांग्रेस की सरकार जाने का दुख उन सभी को है, जो कांग्रेस की विचारधारा में यकीन रखते हैं। इसमें कांग्रेस के कार्यकर्ता ही नहीं, वो सभी भारत के आम नागरिक शामिल हैं, जो आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ हर रोज बिना किसी लोभ के संघर्ष कर रहे हैं।

चौहान से मिले कमलनाथ, राज्य के विकास में सहयोग का दिया आश्वासन
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर उन्हें प्रदेश के विकास के लिए विपक्षी दल कांग्रेस के सहयोग का आश्वासन दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने चौहान से उनके निवास पर मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, 'मैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिला। मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि प्रदेश के विकास के लिए हम उनके साथ हैं।'


मंगलवार को चौहान के विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के वक्त कांग्रेस सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। इस संबंध में पूछे गए सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि उन्हें सत्र के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, 'विश्वास मत एक औपचारिकता थी जिसे पूरा करने की जरुरत थी।'

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