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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Devas: Advice of a Jain saint - why so much ruckus on hijab... is there a conspiracy of another Pakistan

देवास: जैन संत की नसीहत- हिजाब पर इतना बवाल क्यों...क्या एक और पाकिस्तान की है साजिश

Thu, 17 Feb 2022 05:32 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Thu, 17 Feb 2022 05:32 PM IST
सार

कड़वे प्रवचनों के लिए विख्यात रहे समाधिस्थ जैनाचार्य क्रांतिकारी संत श्री तरुणसागर महाराज के एकमात्र शिष्य क्षुल्लक पर्व सागर ने हिजाब विवाद पर नसीहत दी है। कहा है कि हिजाब पर इतना बवाल क्यों मचा है। क्या ये एक और पाकिस्तान की साजिश है। 

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Devas: Advice of a Jain saint - why so much ruckus on hijab... is there a conspiracy of another Pakistan
क्षुल्लक पर्व सागर महाराज - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देशभर में चल रहे हिजाब विवाद को लेकर अब जैन संत की प्रतिक्रिया सामने आई है। कड़वे प्रवचनों के लिए विख्यात समाधिस्थ आचार्य श्री तरुणसागर महाराज के एकमात्र शिष्य क्षुल्लक पर्वसागर ने कहा है कि हिजाब की आड़ में संस्कृति व संस्कारों को धूमिल करने का षड़यंत्र रचने वाले आस्तीन के सांपों को समय रहते नहीं कुचला तो भारत का भविष्य एक और पाकिस्तान होगा।
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मध्यप्रदेश के देवास जिले में पुष्पगिरि जैन तीर्थ है जो देवास-भोपाल मार्ग पर सोनकच्छ के समीप स्थित है। यहां दिगंबर जैन संत गणाचार्य पुष्पदंत सागर की प्रेरणा से पुष्पगिरि तीर्थ का निर्माण हुआ है। गणाचार्य के सान्निध्य में ही क्षुल्लक पर्व सागरजी महाराज पुष्पगिरि में साधनारत हैं जो समाधिस्थ जैन आचार्य श्री तरुण सागर महाराज के एकमात्र शिष्य हैं।  पर्व सागर जी विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं और इस बार हिजाब को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि धर्म की पहचान धार्मिकता से है, तो देश व संस्कृति की पहचान देश के संविधान व शिक्षा से है। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के लिए मंदिर, मस्जिद, चर्च व गुरुद्वारे हैं न कि शिक्षा के मंदिर विद्यालय। विद्यालयों  में चले आ रहे नियमों व वेशभूषा में हस्तक्षेप उचित नहीं है। हिजाब पर इतना बवाल क्यों मचा है। इसका मतलब साफ है कि एक और पाकिस्तान की साजिश है। 
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जो भूल हम अतीत में कर चुके उन्हें पुनः दोहराने देंगे
क्षुल्लक पर्व सागर ने कहा कि कुछ दिनों से हर समय धर्म की आड़ में पहले संस्कृति की सुरक्षा को और अब शिक्षा को अपने स्वार्थ की भोज सामग्री समझ संस्कृति और संस्कारों का ह्रास करने कुछ लोग तुले हैं। माना कि भारत सबको निभाता है। यह देश समरसता और वसुधैव  कुटुंबकम् की शिक्षा व संस्कृति को देता व जीता है पर इसका मतलब यह नहीं कि जो भूल हम अतीत में कर चुके उन्हें पुनः दोहराने देंगे। हिजाब पर इतना बवाल बेबुनियाद है। शिक्षा स्थलों पर पहले देश का संविधान और विद्यालय के नियम मुख्य है, उसके बाद ही धर्म और धार्मिक पौशाक को इस विषय पर स्थान देना चाहिए। देश में रहने वाले देश के गद्दार विद्यालयों को धार्मिक आडंबरों का आखड़ा न बनाएं। इस तरह के हिजाब की आड़ मे संस्कृति व संस्कारों को धूमिल करने का षड़यंत्र रचने वाले आस्तीन के सांपों को समय रहते नहीं कुचला तो भारत का भविष्य एक और पाकिस्तान होगा।
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