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Hanuman Jayanti: यहां एक पैर जमीन के अंदर ही रखते हैं बजरंगबली, जानें क्या है दोनी के हनुमान मंदिर का रहस्य
Sat, 12 Apr 2025 09:18 AM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
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Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Sat, 12 Apr 2025 09:18 AM IST
सार
यह मंदिर अपनी रहस्यमयी मूर्ति के कारण प्रसिद्ध है, जिसमें हनुमान जी के पैर का छोर जमीन में कितनी गहराई तक है, इसका आज तक पता नहीं चल पाया है। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र यह स्थान लगभग चार एकड़ में फैला है।
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दोनी गांव में विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दमोह जिले में आज श्री राम भक्त हनुमान जन्मोत्सव की धूम है। जिले में कई प्रसिद्ध हनुमान मंदिर हैं, उन्हीं में एक मंदिर है दोनी गांव का हनुमान मंदिर। यहां हनुमान जी की प्रतिमा के एक पैर के छोर का पता नहीं जमीन में कितने नीचे तक गया है। जिले भर से श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दमोह जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर तेंदूखेड़ा ब्लाक के दोनी गांव में श्रीराम भक्त हनुमान जी की प्राचीन सिद्ध मूर्ति विराजमान है। यहां आज शनिवार को हनुमान जन्मोत्सव पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। दो वर्ष पहले सिद्ध स्थान के ठीक सामने रामनवमीं को भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण, हनुमान की मूर्ति की स्थापना भव्य मंदिर में की गई है। यहां बावड़ी में 12 माह पानी रहता है, जो कभी खाली नहीं होता।
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16 साल से इस स्थान पर रहकर सेवा करने वाले सेवादार मोहन, कोमल प्रसाद गोटिया ने बताया कि यहां अति प्राचीन बावड़ी में सभी तीर्थ क्षेत्रों का जल समाहित है। हनुमान जी के पैर के छोर तक कोई नहीं पहुंचा है। बताते हैं कि सिद्ध हनुमान मठ में विराजे हनुमान जी के पैर को कई फीट तक खोदे जाने के बाद भी छोर तक नहीं पहुंचा जा सका। मूर्ति की प्राचीनता का कोई स्पष्ट अनुमान नहीं है। यहां अखंड ज्योति लगभग 18 वर्ष से प्रज्ज्वलित है।
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कमल नारायण यादव ने बताया कि हनुमान जी की मूर्ति मंदिर के अंदर महुआ के पेड़ के नीचे विराजमान है। जब तक मंदिर का निर्माण नहीं हुआ था तब तक यह मूर्ति खुले में महुआ के पेड़ के नीचे विराजमान थी। अब उसी जगह पर मंदिर बना दिया है। महुआ के पेड़ को भी हटाया नहीं गया है। गुंबद से एक आकार देकर उस पेड़ को ऊपर निकाला गया है। लगभग चार एकड़ में यह स्थान फैला है। हनुमान जन्मोत्सव पर सैलवाड़ा से दौनी तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर महाआरती एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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16 साल से इस स्थान पर रहकर सेवा करने वाले सेवादार मोहन, कोमल प्रसाद गोटिया ने बताया कि यहां अति प्राचीन बावड़ी में सभी तीर्थ क्षेत्रों का जल समाहित है। हनुमान जी के पैर के छोर तक कोई नहीं पहुंचा है। बताते हैं कि सिद्ध हनुमान मठ में विराजे हनुमान जी के पैर को कई फीट तक खोदे जाने के बाद भी छोर तक नहीं पहुंचा जा सका। मूर्ति की प्राचीनता का कोई स्पष्ट अनुमान नहीं है। यहां अखंड ज्योति लगभग 18 वर्ष से प्रज्ज्वलित है।
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कमल नारायण यादव ने बताया कि हनुमान जी की मूर्ति मंदिर के अंदर महुआ के पेड़ के नीचे विराजमान है। जब तक मंदिर का निर्माण नहीं हुआ था तब तक यह मूर्ति खुले में महुआ के पेड़ के नीचे विराजमान थी। अब उसी जगह पर मंदिर बना दिया है। महुआ के पेड़ को भी हटाया नहीं गया है। गुंबद से एक आकार देकर उस पेड़ को ऊपर निकाला गया है। लगभग चार एकड़ में यह स्थान फैला है। हनुमान जन्मोत्सव पर सैलवाड़ा से दौनी तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर महाआरती एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
